देश की राजनीति और विशेषकर महाराष्ट्र के सियासी गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। शरद पवार की एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में एक बड़ा राष्ट्रीय स्तर का विभाजन (Split) तय माना जा रहा है। खुद शिवसेना UBT के शीर्ष नेतृत्व ने अपने लोकसभा सांसदों के टूटने की खबरों पर परोक्ष रूप से मुहर लगा दी है। संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में पार्टी के कुल 9 सांसदों में से 6 सांसदों के अलग गुट बनाने और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली ‘असली’ शिवसेना में शामिल होने की गंभीर अटकलें हैं।
संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने स्पीकर को लिखा पत्र; संजय राउत का ₹15 करोड़ का बड़ा दावा
इस संभावित बगावत को भांपते हुए शिवसेना UBT के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने कल देर रात लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिडला को एक अति-गोपनीय पत्र लिखा है। पत्र में सावंत ने कहा है कि हमारे कुछ सांसद संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर अलग होने के लिए आपसे संपर्क कर सकते हैं, अतः बिना मूल संगठन की अनुमति के किसी भी बागी गुट को मान्यता न दी जाए। वहीं दूसरी ओर, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने सोशल मीडिया पर ‘अपना सपना मनी मनी’ लिखते हुए एक बड़ा और सनसनीखेज आरोप लगाया है। राउत के मुताबिक, उनके सांसदों को पाला बदलने के लिए ₹15-15 करोड़ रुपये का भारी-भरकम ऑफर दिया जा रहा है।
NDA का आंकड़ा पहुंचेगा 313; महिला आरक्षण लागू करने के लिए हो रही सारी मशक्कत
राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि ये 6 सांसद पाला बदलते हैं, तो संसद में दलबदल कानून (Tenth Schedule) के तहत वे अयोग्य होने से बच जाएंगे, क्योंकि यह संख्या दो-तिहाई के आंकड़े को छूती है। इससे लोकसभा में शिंदे गुट की शिवसेना के सांसदों की संख्या 13 तक पहुंच सकती है। संसद के भीतर हो रही इस बड़ी उथल-पुथल का सीधा कनेक्शन केंद्र की सत्ताधारी एनडीए (NDA) सरकार के एक महा-प्लान से जोड़ा जा रहा है। इस टूट के बाद लोकसभा में NDA का कुल आंकड़ा 313 तक पहुंच जाएगा। सूत्रों का दावा है कि यह सारी मशक्कत देश में ‘महिला आरक्षण’ (Women’s Reservation) को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए आवश्यक ‘परिसीमन कानून’ (Delimitation Bill) को संसद से पास कराने के लिए हो रही है। चूंकि यह एक ऐतिहासिक ‘संविधान संशोधन’ (Constitutional Amendment) विधेयक है, इसलिए इसे पास कराने के लिए सदन में 362 सांसदों यानी स्पष्ट दो-तिहाई बहुमत की सख्त आवश्यकता है, जिसे हासिल करने के लिए विपक्ष के किलों में लगातार सेंधमारी जारी है।


















