मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां संदिग्ध जहरीली शराब के सेवन से अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, कई लोगों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में जारी है। इस हृदयविदारक घटना के सामने आते ही जिले में हड़कंप मच गया है और प्रशासनिक अमला फौरन हरकत में आ गया है।
20 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और आबकारी विभाग ने संयुक्त रूप से अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ बड़े स्तर पर धरपकड़ शुरू कर दी है।
- कड़ी कानूनी कार्रवाई: पुलिस प्रशासन ने अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री में लिप्त 20 आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, मिलावट और आबकारी अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
- दबिश और जब्ती: कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर शराब के नमूने लैब परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, ताकि जहरीले तत्वों की पुष्टि हो सके। कुछ मुख्य आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
अस्पताल पहुंचे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, जाना पीड़ितों का हाल हादसे की खबर मिलते ही मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सागर पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती पीड़ितों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और ढांढस बंधाया। इसके साथ ही उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिए कि घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
अस्पताल परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए उमंग सिंघार ने राज्य सरकार और आबकारी महकमे पर तीखा हमला बोला:
- सिंडिकेट और मिलीभगत का आरोप: उन्होंने कहा कि बिना प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण के खुलेआम अवैध और जहरीली शराब का कारोबार फल-फूल ही नहीं सकता।
- मुआवजे और उच्च स्तरीय जांच की मांग: नेता प्रतिपक्ष ने मृतकों के परिजनों को उचित आर्थिक मुआवजा देने, पीड़ित परिवारों के भरण-पोषण की व्यवस्था करने और पूरे शराब माफिया नेटवर्क की न्यायिक या उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर प्रदेश में अवैध शराब के फैले जाल और आबकारी विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सागर शराब कांड, प्रशासनिक कार्रवाई और मध्य प्रदेश की हर जमीनी और प्रामाणिक (Authentic) रिपोर्ट के लिए हमारी वेबसाइट के साथ जुड़े रहें।












