मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), ईवीएम की पारदर्शिता और चुनाव प्रक्रिया में कथित धांधली को लेकर विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। बुधवार, 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों की करीब साढ़े तीन घंटे लंबी साझा बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़े एक्शन प्लान की घोषणा की।
खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव आयोग को पूरी तरह अपनी ‘कठपुतली’ बना रखा है। उन्होंने ऐलान किया कि 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकाला जाएगा, जबकि 6 अक्टूबर को सभी विपक्षी सांसद संसद से निर्वाचन आयोग कार्यालय (निर्वाचन सदन) तक पैदल मार्च कर आयोग का घेराव करेंगे।
बैठक में 19 से 20 विपक्षी दल हुए शामिल; उद्धव-हेमंत वर्चुअली जुड़े
दिल्ली में आयोजित इस बैठक में लोकसभा व राज्यसभा के 240 से अधिक सांसदों का प्रतिनिधित्व करने वाले विपक्षी दलों के शीर्ष नेतृत्व ने हिस्सा लिया:
- बैठक में मौजूद दिग्गज: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, सपा, राजद, एनसीपी (शरद पवार), शिवसेना (यूबीटी), वाम दल (सीपीएम, सीपीआई), नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और जेएमएम सहित लगभग 20 दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
- वर्चुअल सहभागिता: महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े और आंदोलन की रूपरेखा पर अपनी सहमति जताई। (हालांकि, आम आदमी पार्टी और डीएमके के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल नहीं हुए)।
विपक्ष का देशव्यापी आंदोलन का पूरा रोडमैप
विपक्षी गठबंधन ने चरणबद्ध तरीके से सड़क से लेकर संवैधानिक संस्थाओं तक मोर्चा खोलने का कार्यक्रम तय किया है:
- 2 से 8 अक्टूबर (देशव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च): गांधी जयंती के दिन 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देश के हर जिले में जिला मुख्यालयों और डीएम (कलेक्टर) दफ्तरों के सामने विशाल विरोध प्रदर्शन व पैदल मार्च निकाले जाएंगे।
- 6 अक्टूबर (विपक्षी सांसदों का EC घेराव): लोकसभा और राज्यसभा के सभी विपक्षी सांसद नई दिल्ली में एकजुट होकर केंद्रीय चुनाव आयोग (निर्वाचन सदन) की ओर कूच करेंगे और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध दर्ज कराएंगे।
- अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में राष्ट्रपति से मुलाकात: विपक्षी नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से समय मांगकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची से कथित तौर पर करोड़ों नाम काटे जाने और संस्थाओं के दुरुपयोग को लेकर औपचारिक ज्ञापन सौंपेगा।
- 1 नवंबर को दिल्ली में महारैली: आंदोलन के अगले चरण के तहत 1 नवंबर को देश की राजधानी दिल्ली में एक ऐतिहासिक संयुक्त महारैली आयोजित की जाएगी, जिसके बाद देश के 5 प्रमुख शहरों में भी बड़ी रैलियां होंगी।
‘ज्ञानेश कुमार कठपुतली हैं, तुरंत इस्तीफा दें’ — खड़गे और ममता के तीखे बोल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला:
- मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान: “चुनाव आयोग अब स्वतंत्र संवैधानिक संस्था नहीं रहा, बल्कि सत्तापक्ष के इशारों पर नाचने वाली कठपुतली बन चुका है। मोदी-शाह की शह पर वोट चोरी का खेल चल रहा है। लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दलों के साथ युवाओं, छात्रों, एनजीओ और आम जनता को सड़कों पर उतरना होगा। हमारी मांग है कि आगामी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं और मतदाता सूची में पारदर्शिता लाई जाए।”
- ममता बनर्जी का आक्रामक रुख: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के माध्यम से विपक्ष शासित राज्यों में वोट काटे जा रहे हैं।
- राहुल गांधी का संकल्प: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र किसी भी व्यक्ति या सरकार से बड़ा है। जिन लोगों ने संस्थाओं पर कब्जा कर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है, विपक्षी दल मिलकर उनकी जवाबदेही तय करेंगे और जनता के अधिकारों की रक्षा करेंगे।
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