मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (MPSEC) ने चुनावी प्रबंधन और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक अनूठी मिसाल कायम की है। आयोग ने अपनी अभिनव ‘ईवीएम शेयरिंग पॉलिसी’ (EVM Sharing Policy) के तहत दूसरे राज्यों के स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों के लिए अपनी अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVMs) किराए पर देकर करीब ₹11 करोड़ की उल्लेखनीय आय अर्जित की है। मध्य प्रदेश की इन मशीनों का उपयोग महाराष्ट्र, राजस्थान और सिक्किम जैसे राज्यों के स्थानीय चुनावों में सफलतापूर्वक किया गया।
इस राजस्व मॉडल के साथ-साथ राज्य निर्वाचन आयोग ने 29 सितंबर को संपन्न हुए पंचायत और नगरीय निकायों के उपचुनावों में डिजिटल टूल्स और चुनावी सॉफ्टवेयर का बड़े पैमाने पर ‘पायलट ट्रायल’ किया है। आयोग की योजना आगामी वर्ष 2027 में होने वाले त्रि-स्तरीय पंचायत और नगरीय निकाय के वृहद आम चुनावों को पूरी तरह इसी एडवांस डिजिटल पैटर्न पर कराने की है।
दूसरे राज्यों को EVM किराए पर देने से उपजी चुनौती और इन-हाउस सॉफ्टवेयर
ईवीएम के अंतर-राज्यीय हस्तांतरण (Inter-State Transfer) के बाद आयोग के सामने मशीनों के डेटाबेस को एकीकृत रखने की बड़ी तकनीकी चुनौती थी:
- EVM रेंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर: जब एक राज्य की मशीन दूसरे राज्य में जाती है, तो दोनों राज्यों के चुनावी डेटाबेस अलग-अलग होते हैं। मशीनों की पहचान, ट्रैकिंग, उपलब्धता, वापसी और पुनः रेंडमाइजेशन के लिए मप्र राज्य निर्वाचन आयोग की आईटी विंग ने अपना विशेष ‘EVM Randomisation Software’ विकसित किया।
- पूर्ण पारदर्शिता: इस सॉफ्टवेयर के जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि किस बूथ पर कौन सी मशीन भेजी जा रही है, उसकी पूरी डिजिटल हिस्ट्री और बारकोड ट्रैकिंग पारदर्शी व ट्रेस करने योग्य रहे।
उपचुनावों में आजमाए गए ये 3 बड़े डिजिटल इनोवेशन
- एडवांस IEMS (इंटीग्रेटेड इलेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम): मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 से चुनावी प्रक्रियाओं में आईईएमएस (IEMS) का उपयोग हो रहा है, लेकिन अब इसका उन्नत संस्करण तैयार किया गया है। पूर्व में जिला स्तर से डेटा आने के बाद राज्य स्तर पर अगला चरण शुरू होता था। नए मॉडल में मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन और अधिसूचना जारी होते ही आगे की चुनावी प्रक्रियाएं सिस्टम-संचालित (System-Driven) तरीके से स्वतः ट्रिगर हो जाती हैं, जिससे मैन्युअल मॉनिटरिंग और कागजी फाइलों की जरूरत समाप्त हो गई है।
- ‘प्रेक्षा’ (Preksha) ऐप — सीधे आयोग तक पहुंचेगी ऑब्जर्वर रिपोर्ट: चुनाव प्रेक्षकों (Election Observers) और मतदाता सूची प्रेक्षकों (Roll Observers) के फील्ड रिपोर्टिंग की जटिलता को दूर करने के लिए आयोग ने ‘प्रेक्षा’ ऐप लॉन्च किया है। इसके जरिए प्रेक्षक सीधे मतदान केंद्रों से अपनी गोपनीय रिपोर्ट, प्रशिक्षण इनपुट और उपस्थिति सीधे IEMS के केंद्रीय बैकएंड पर सबमिट कर रहे हैं।
- पोलिंग स्टेशन सर्वे ऐप — हर बूथ का ‘डिजिटल हेल्थ कार्ड’: मतदान केंद्रों पर सुविधाओं की जांच अब कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहेगी। इस ऐप के माध्यम से अधिकारियों ने मौके पर जाकर रैंप की उपलब्धता, दिव्यांग मतदाताओं के लिए सुगमता, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली, भवन की स्थिति और संपर्क सड़क का जीपीएस-आधारित डिजिटल सत्यापन किया। खामी पाए जाने पर ऐप के जरिए ही सुधार की मॉनिटरिंग की जा रही है।
अगले साल के आम चुनावों के लिए बना फुलप्रूफ ब्लूप्रिंट
मध्य प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले पंचायत और नगरीय निकायों के आम चुनाव काफी व्यापक पैमाने पर होने हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा हालिया उपचुनावों में किए गए इन सफल तकनीकी परीक्षणों ने साबित कर दिया है कि मतदान केंद्रों की डिजिटल मैपिंग से लेकर मशीनों के आवंटन और त्वरित परिणाम घोषित करने तक की समूची प्रक्रिया पूरी तरह ‘पेपरलेस और ऑटोमेटेड’ होगी।
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