मध्य प्रदेश में करीब एक सप्ताह के सूखे और तेज धूप के बाद मानसून ने एक बार फिर जोरदार वापसी की है। बंगाल की खाड़ी और उससे सटे ओडिशा-आंध्र तट पर सक्रिय हुए नए वेदर सिस्टम (लो-प्रेशर एरिया) और चक्रवाती हवाओं के घेरे के प्रभाव से प्रदेश में बादलों का डेरा जमने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भोपाल केंद्र ने शनिवार, 12 सितंबर से मानसूनी गतिविधियों में तेजी आने और 13 से 15 सितंबर के दौरान पश्चिमी और दक्षिणी मध्य प्रदेश के करीब 15 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) का अलर्ट जारी किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह नया मानसूनी स्पेल पश्चिमी मध्य प्रदेश और मालवा-निमाड़ क्षेत्र में बारिश के मौजूदा बैकशॉट और घाटे (Rain Deficit) को पाटने में काफी मददगार साबित होगा।
13 से 15 सितंबर: इन 15 जिलों के लिए अलर्ट मौसम विज्ञानियों के अनुसार, यह सिस्टम पूर्वी मध्य प्रदेश से प्रवेश कर अगले 48 घंटों में पश्चिमी हिस्से की ओर बढ़ेगा। इसके चलते 13 से 15 सितंबर के बीच विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है:
- मालवा-निमाड़ अंचल: बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, अलीराजपुर, झाबुआ, धार और इंदौर जिले।
- नर्मदापुरम व महाकौशल क्षेत्र: नर्मदापुरम (होशंगाबाद), हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा और जबलपुर संभाग से जुड़े सीमावर्ती इलाके।
- मध्य व बुंदेलखंड संभाग: रायसेन, सीहोर और सागर संभाग के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका है।
सिस्टम क्यों हुआ सक्रिय? वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय वायुमंडल में तीन मानसूनी प्रणालियां एक साथ सक्रिय हो रही हैं:
- लो-प्रेशर एरिया (Low Pressure Area): बंगाल की खाड़ी के उत्तरी भाग में बना कम दबाव का क्षेत्र आगे बढ़कर मध्य भारत की ओर रुख कर रहा है।
- मानसून ट्रफ: मानसून ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति के करीब आ रही है, जिससे बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ से लगातार नमी (Moisture Feed) प्रदेश में पहुंच रही है।
- साइक्लोनिक सर्कुलेशन: पश्चिमी मध्य प्रदेश के ऊपर स्थानीय स्तर पर भी चक्रवाती हवाओं का परिसंचरण बनने से बादलों का घनत्व बढ़ गया है।
किसानों को राहत, लेकिन सोयाबीन उत्पादकों को सावधानी की सलाह बीते कई दिनों से बारिश थमने और तेज धूप निकलने से फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा मंडराने लगा था:
- फसलों को जीवनदान: वर्तमान में पकने की ओर बढ़ रही सोयाबीन, मक्का, धान और दलहन की फसलों के लिए यह बारिश संजीवनी का काम करेगी।
- जलजमाव से बचाव की हिदायत: कृषि विभाग और मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि 13 से 15 सितंबर के बीच होने वाली तेज वर्षा को देखते हुए खेतों से जल निकासी (Drainage) का उचित प्रबंध रखें, ताकि खेतों में अधिक समय तक पानी जमा न रहे और फलियों में फंगस न लगे।
- आकाशीय बिजली से बचाव: बारिश और तेज हवाओं के दौरान किसानों और मवेशी चराने वालों को खुले मैदानों या ऊंचे पेड़ों के नीचे न खड़े होने की सख्त चेतावनी दी गई है।
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