स्कूली बच्चों में मोटापे, मधुमेह, दांतों की सड़न और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) ने एक बड़ा और नीतिगत कदम उठाया है। आयोग ने राज्य सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग और खाद्य सुरक्षा प्रशासन को स्कूलों की चहारदीवारी के 50 मीटर के दायरे को पूरी तरह ‘नो-जंक फूड’ और ‘हेल्दी फूड जोन’ (Healthy Food Zone) घोषित करने की विस्तृत अनुशंसा भेजी है।
आयोग का उद्देश्य स्कूल परिसरों के आसपास अनियंत्रित रूप से बिकने वाले अधिक वसा, चीनी और नमक (HFSS – High Fat, Sugar and Salt) वाले खाद्य पदार्थों, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेटबंद अल्ट्रा-प्रोसेस्ड उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाना है।
FSSAI के दिशा-निर्देशों को धरातल पर उतारने की तैयारी भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा ‘सेफ एंड न्यूट्रिशियस फूड एट स्कूल’ (Safe and Nutritious Food at School Regulations) के तहत पहले से निर्धारित मानकों का हवाला देते हुए आयोग ने इसे सख्ती से लागू कराने पर जोर दिया है:
- 50 मीटर का दायरा प्रतिबंधित: स्कूल गेट और बाउंड्री से 50 मीटर के दायरे में चाउमीन, बर्गर, पिज्जा, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स और तले-भुने स्नैक्स बेचने वाले ठेलों, खोखों और दुकानों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
- स्कूल कैंटीन का मेन्यू बदलेगा: आयोग ने कहा है कि स्कूल परिसरों के भीतर संचालित कैंटीनों में केवल पौष्टिक, ताजा और पारंपरिक रूप से संतुलित आहार (जैसे मौसमी फल, अंकुरित अनाज, लस्सी, छाछ, नारियल पानी और ताजा पका भोजन) ही परोसा जाए।
- स्पष्ट चेतावनी बोर्ड: सभी शासकीय और निजी विद्यालयों के मुख्य द्वार पर ‘हेल्दी फूड जोन’ का बोर्ड लगाना अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है।
बच्चों के गिरते स्वास्थ्य और न्यूट्रिशन पर आयोग की चिंता बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में शहरी और कस्बाई दोनों क्षेत्रों के स्कूली छात्रों में जंक फूड की लत गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है:
- जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां: चिकित्सकों और बाल रोग विशेषज्ञों की रिपोर्टों से स्पष्ट हुआ है कि अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड के सेवन से किशोर उम्र के बच्चों में मोटापा (Obesity), हाइपरटेंशन और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं।
- पोषण का अभाव: जंक फूड के अत्यधिक सेवन से बच्चों की नियमित भूख खत्म होती है, जिससे वे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों (आयरन, कैल्शियम, विटामिन) से वंचित रह जाते हैं और उनमें कुपोषण व एनीमिया का जोखिम बना रहता है।
नगरीय निकाय और खाद्य सुरक्षा विभाग मिलकर करेंगे निगरानी आयोग ने सिफारिश में स्पष्ट किया है कि इस नियम को सफल बनाने के लिए बहु-विभागीय समन्वय आवश्यक होगा:
- संयुक्त निरीक्षण दल: नगर निगम, नगर पालिका, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें स्कूलों के आसपास औचक निरीक्षण करेंगी।
- दुकानदारों व वेंडर्स की काउंसलिंग: प्रतिबंध लागू करने के साथ-साथ वेंडर्स को पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक स्नैक्स (जैसे भुना चना, फल, बाजरा-ज्वार आधारित उत्पाद) बेचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका: अभिभावक-शिक्षक बैठकों (PTM) में भी बच्चों के खान-पान की आदतों और टिफिन में जंक फूड न भेजने को लेकर जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे।
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