मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) द्वारा घोषित की गई ‘धर्म रक्षा पदयात्रा’ को लेकर सूबे की सियासत में एक बेहद दिलचस्प और नया मोड़ आ गया है। उज्जैन के बाबा महाकाल की नगरी से लेकर प्रभु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या तक निकलने वाली इस धार्मिक यात्रा को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक स्वयंसेवक ने दिग्विजय सिंह को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में स्वयंसेवक ने संघ के मुख्य प्रतीक ‘भगवा ध्वज’ को त्यागकर दिग्विजय सिंह की यात्रा में शामिल होने का एक बेहद चौंकाने वाला और ‘सशर्त’ (Conditional) प्रस्ताव दिया है।
पीपाजी महाराज के वंशज और ‘हिंदूपत’ राजा कहकर दिया सम्मान
संघ के स्वयंसेवक ने अपने पत्र की शुरुआत ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ करते हुए दिग्विजय सिंह के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया है। पत्र में लिखा गया है:
“आप हमारे लिए सम्माननीय हैं। इसलिए नहीं कि आप एक बड़े नेता हैं या 10 सालों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। बल्कि इसलिए कि आप संत पीपाजी महाराज के वंशज हैं। आपके पूर्वजों को ‘हिंदूपत’ की उपाधि रही है और आप जिस राघोगढ़ नगरी के राजा रहे हैं, वह राघौजी महाराज के नाम से विभूषित है।”
संघ प्रमुख और कारसेवकों को आमंत्रित करने की मंशा का स्वागत
पत्र में आगे दिग्विजय सिंह की इस यात्रा के उद्देश्यों और उनकी मंशा की सराहना की गई है। स्वयंसेवक ने लिखा कि यह बेहद स्वागत योग्य (स्वागतेय) बात है कि दिग्विजय सिंह अपनी इस धर्म रक्षा यात्रा में श्री राम जन्मभूमि के कारसेवकों और संघ प्रमुख (सरसंघचालक) डॉ. मोहन भागवत को सहभागिता के लिए आमंत्रित करने की इच्छा रखते हैं। पत्र में कहा गया है कि, “कारसेवक अथवा भागवत जी इस यात्रा में आएंगे या नहीं, यह मुझे नहीं पता। लेकिन मैं खुद संघ के भगवा ध्वज को त्याग कर आपकी इस यात्रा में आने के लिए पूरी तरह तत्पर और तैयार हूं।”
सस्पेंस बरकरार: “बस मेरा एक निवेदन स्वीकार कीजिए…”
स्वयंसेवक ने पत्र के अंत में एक बड़ा सस्पेंस छोड़ते हुए दिग्विजय सिंह के सामने अपनी शर्त रख दी है। उन्होंने लिखा है, “बस मेरा एक निवेदन है, उसे सहृदयता पूर्वक स्वीकार कीजिए।” हालांकि, संघ कार्यकर्ता ने इस पत्र के मुख्य हिस्से में उस विशिष्ट ‘शर्त’ या ‘निवेदन’ का खुलकर खुलासा नहीं किया है कि वे दिग्विजय सिंह से किस बात का वादा या कौन सा संकल्प चाहते हैं।
क्या है दिग्विजय सिंह की धर्म रक्षा यात्रा?
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म की रक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द के संदेश के साथ मध्य प्रदेश के उज्जैन (महाकाल) से उत्तर प्रदेश के अयोध्या (राम मंदिर) तक एक विशाल पदयात्रा निकालने की घोषणा की है। इस यात्रा के जरिए वे लगातार हिंदू समाज और विभिन्न धार्मिक संगठनों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में संघ के एक स्वयंसेवक द्वारा सीधे तौर पर भगवा ध्वज को किनारे रखकर यात्रा में शामिल होने की बात कहना राजनीतिक और सामाजिक हलकों में जमकर चर्चा बटोर रहा है। अब देखना यह होगा कि दिग्विजय सिंह इस खुले पत्र और रहस्यमयी शर्त पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।












