मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने ग्रामीण विकास, पंचायती राज व्यवस्था और सरकारी फंड के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए एक बहुत बड़ा डिजिटल शंखनाद किया है। राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आज ‘दृष्टि’ (Drishti) ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया गया है। इस क्रांतिकारी कदम के बाद अब प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों के स्तर पर होने वाली ऑडिट प्रक्रिया (Audit Process) न केवल अत्यधिक पारदर्शी और सरल हो जाएगी, बल्कि वित्तीय विसंगतियों पर भी पूरी तरह लगाम लगेगी।
इसी भव्य कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण व्यवस्था को मजबूत करने वाले विभाग के मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘पंचायत दर्पण’ (Panchayat Darpan Portal) पर एक अत्याधुनिक पेमेंट गेटवे (Payment Gateway) की भी शुरुआत की गई है, जो ग्राम पंचायतों के वित्तीय लेन-देन को पूरी तरह कैशलेस और सुरक्षित बनाएगा।
‘दृष्टि’ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म: वित्तीय गड़बड़ियों पर लगेगी लगाम
अब तक पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों और उनके खर्चों का ऑडिट पारंपरिक कागजी या अर्ध-डिजिटल माध्यमों से होता था, जिससे जांच में देरी और पारदर्शिता का अभाव रहता था। ‘दृष्टि’ प्लेटफॉर्म इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा:
- पारदर्शी और सरल ऑडिट: इस प्लेटफॉर्म के जरिए पंचायतों के हर एक खर्च, निर्माण कार्य की जियो-टैगिंग और बिलों का मिलान सीधे ऑनलाइन मोड में किया जाएगा। ऑडिटर्स और आम नागरिक भी एक क्लिक पर विकास कार्यों का स्टेटस देख सकेंगे।
- समय पर समीक्षा: ऑनलाइन डेटा फीड होने के कारण किसी भी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी होने पर सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
‘पंचायत दर्पण’ पोर्टल पर पेमेंट गेटवे: सीधे होगा डिजिटल भुगतान
पंचायतों के सुचारू संचालन और वेंडर्स (सामग्री प्रदाताओं) को होने वाले भुगतान को लेकर अक्सर शिकायतें आती थीं, जिसके समाधान के लिए ‘पंचायत दर्पण’ पोर्टल को नए पेमेंट गेटवे से इंटीग्रेट किया गया है:
- कैशलेस लेन-देन: पंचायतों को मिलने वाली सरकारी राशि और उनके द्वारा किए जाने वाले भुगतानों के लिए अब किसी चेक या मैन्युअल ड्राफ्ट की जरूरत नहीं होगी।
- पारदर्शिता की गारंटी: पेमेंट गेटवे के जरिए सामग्री सप्लायरों, मजदूरों के पारिश्रमिक और अन्य प्रशासनिक खर्चों का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में रीयल-टाइम (Real-time Transfer) ट्रांसफर किया जाएगा। इससे ‘कमीशन खोरी’ और लेटलतीफी की परंपरा का पूरी तरह अंत होगा।
“जवाबदेह और सशक्त बनेंगी ग्राम पंचायतें” — शासन का संकल्प
विभागीय अधिकारियों और मंत्रियों ने इस लॉन्चिंग को मध्य प्रदेश के ग्रामीण गवर्नेंस (Rural Governance) में मील का पत्थर बताया है। शासन का मानना है कि इन दोनों तकनीकों के जुड़ने से सरपंच, सचिव और जनपद स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
सबसे बड़ी बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के आम नागरिक भी अब अपने मोबाइल फोन के माध्यम से यह जान सकेंगे कि उनकी पंचायत को कितना फंड मिला, वह कहाँ खर्च हुआ और उसका ऑडिट स्टेटस क्या है। यह पहल ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन को सुदूर गांवों तक मजबूती से स्थापित करेगी।












