भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों की छवि आमतौर पर कड़क और रसूखदार प्रशासनिक प्रमुख की होती है, लेकिन देश में कुछ ऐसे भी अफसर हैं जो अपनी सादगी, संवेदनशीलता और जनता के प्रति अपने जुड़ाव के कारण ‘मसीहा’ बन जाते हैं। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक इन दिनों एक ऐसे ही आईएएस अधिकारी की चर्चा जोरों पर है, जिनके काम करने के अंदाज के लोग दीवाने हो चुके हैं। खास बात यह है कि उनकी पत्नी भी एक बेहद काबिल और लोकप्रिय जिला कलेक्टर हैं। इस पावर-कपल (Power Couple) ने अपनी सेवा भावना से प्रशासनिक गलियारों में एक नई मिसाल पेश की है।
आइए जानते हैं इस लोकप्रिय आईएएस अफसर और उनके सेवा भाव की वो कहानी, जो हर किसी को प्रेरित कर रही है:
मुख्यालय से बाहर निकलकर सीधे मजबूरों के बीच पहुंचना पहचान
आमतौर पर फाइलों और दफ्तरों में सिमटी रहने वाली नौकरशाही से इतर, इस आईएएस अधिकारी की सबसे बड़ी खूबी उनका फील्ड पर एक्टिव रहना है। चाहे चिलचिलाती धूप हो या मूसलाधार बारिश, वे सीधे उन बस्तियों और झोपड़ियों तक पहुंच जाते हैं जहां समाज का सबसे गरीब और वंचित तबका रहता है।
- बुजुर्गों के आंसू पोंछना: अपने दौरों के दौरान जब भी उन्हें कोई बेसहारा बुजुर्ग मिलता है, तो वे प्रोटोकॉल तोड़कर जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते हैं। पेंशन रुकने, रहने का ठिकाना न होने या इलाज की कमी जैसी समस्याओं को वे मौके पर ही फोन घुमाकर अधिकारियों के जरिए तुरंत हल करवाते हैं।
- मजबूरों के लिए आधी रात को एक्शन: कई बार देखा गया है कि कड़ाके की ठंड या आपदा के समय यह अफसर खुद कंबल और राहत सामग्री लेकर आधी रात को सड़कों पर निकल पड़ते हैं। यही वजह है कि स्थानीय जनता ने इन्हें ‘बुजुर्गों और मजबूरों का मसीहा’ कहना शुरू कर दिया है।
पत्नी भी हैं बेहद लोकप्रिय कलेक्टर; दोनों की जुगलबंदी कमाल
इस आईएएस अधिकारी की निजी और पेशेवर जिंदगी की सबसे खूबसूरत बात यह है कि उनकी जीवनसंगिनी (पत्नी) भी भारतीय प्रशासनिक सेवा में हैं और एक जिले की कमान संभाल रही हैं।
- जनता से सीधा संवाद: उनकी पत्नी की छवि भी एक बेहद संवेदनशील और सख्त प्रशासनिक अधिकारी की है। वे महिला सशक्तिकरण, बाल विकास और सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर औचक निरीक्षण करने के लिए जानी जाती हैं।
- सोशल मीडिया पर तगड़ी फैन फॉलोइंग: इस आईएएस दंपति की सादगी और बिना किसी तामझाम के जनता के बीच जाकर काम करने की तस्वीरें अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं। आज का युवा वर्ग इन्हें अपना रोल मॉडल (Ideals) मानता है।
नौकरशाही का असली चेहरा: जब पद बनता है सेवा का माध्यम
यूपीएससी (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद लाल बत्ती और बंगले की चकाचौंध कई लोगों को बदल देती है, लेकिन इस दंपति ने साबित किया है कि असली ताकत पद में नहीं, बल्कि उस पद से किसी मजबूर के चेहरे पर लाई गई मुस्कान में है।
चाहे किसी लाचार बुजुर्ग को उसकी खोई हुई जमीन वापस दिलाना हो, या किसी गरीब बच्चे के इलाज का पूरा खर्च उठाना हो—इस आईएएस अफसर की कार्यशैली यह सिखाती है कि यदि इरादे नेक हों, तो प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह जनता के प्रति जवाबदेह और संवेदनशील बनाया जा सकता है।











