मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) से संबद्ध हमीदिया अस्पताल को 3,000 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने की सरकारी योजना के बीच एक बड़ा प्रशासनिक गतिरोध सामने आया है। अस्पताल में प्रस्तावित नवजात न्यूरोलॉजी (Neonatal Neurology) और पीडियाट्रिक कार्डियक (बाल हृदय रोग) जैसी अति-महत्वपूर्ण सुपर-स्पेशियलिटी इकाइयों के लिए प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्तियां कानूनी व नीतिगत पेंच के कारण लंबे समय से लंबित पड़ी हुई हैं।
अन्य सामान्य चिकित्सा विभागों में नियमित नियुक्तियों का दौर आगे बढ़ चुका है, लेकिन सुपर-स्पेशियलिटी विंग्स के लिए फैकल्टी चयन प्रक्रिया शुरू न होने से यह महत्वाकांक्षी बाल चिकित्सा परियोजना फिलहाल अधर में लटकी हुई है।
सीधी भर्ती बनाम विभागीय पदोन्नति का विवाद
इस पूरे गतिरोध की मुख्य जड़ चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) द्वारा सीधी भर्ती के जरिए प्रोफेसरों के पद भरने का पूर्व फैसला था:
- शिक्षकों का विरोध: मध्य प्रदेश मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (MPMTA) ने इन वरिष्ठ पदों पर सीधी भर्ती का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि यह इन-हाउस कार्यरत सीनियर फैकल्टी के पदोन्नति अधिकारों का हनन है। एसोसिएशन का रुख था कि असिस्टेंट प्रोफेसर के पद तो सीधी भर्ती से भरे जा सकते हैं, लेकिन एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों को अनिवार्य रूप से विभागीय पदोन्नति (Promotion) के जरिए ही भरा जाना चाहिए।
- DME की रोक: शिक्षकों के कड़े विरोध के बाद चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने सुपर-स्पेशियलिटी संवर्गों में डायरेक्ट रिक्रूटमेंट पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट का सख्त रुख: पदोन्नति के पदों को सीधी भर्ती में बदलना ‘अवैध’
मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचने के बाद अदालत ने भी चिकित्सा शिक्षकों के पक्ष को मजबूत आधार दिया:
- भर्ती प्रक्रिया खारिज: हाईकोर्ट ने जीएमसी भोपाल में वरिष्ठ फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करते हुए पदोन्नति वाले पदों को सीधी भर्ती में बदलने के प्रशासनिक कदम को स्पष्ट रूप से वैधानिक नियमों के विपरीत करार दिया।
- स्टैच्युटरी नियमों के पालन का निर्देश: अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि नियोनेटनल न्यूरोलॉजी और कार्डियक जैसी संवेदनशील सुपर-स्पेशियलिटीज के प्रोफेसर पदों को विभागीय मूल्यांकन व पदोन्नति नियमों के तहत ही भरा जाए, न कि इन-हाउस अनुभवी डॉक्टरों की अनदेखी करके।
मरीजों को सुपर-स्पेशियलिटी इलाज के लिए इंतजार
हमीदिया अस्पताल में बच्चों के जटिल मस्तिष्क और हृदय रोगों के इलाज के लिए अत्याधुनिक विंग तैयार किए जाने का प्रस्ताव है, ताकि गरीब परिवारों को महंगे निजी अस्पतालों या राज्य के बाहर न जाना पड़े।
- हालांकि, फैकल्टी की तैनाती न होने से अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद और वार्डों के संचालन की पूरी रूपरेखा रुकी हुई है।
- मामले पर मप्र मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय का कहना है कि पूरी प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है और नियमों के तहत जल्द ही पदोन्नति व चयन की आधिकारिक घोषणा की उम्मीद है।
हमीदिया अस्पताल और जीएमसी प्रशासन को अब शासन स्तर से हरी झंडी मिलने का इंतजार है, ताकि बच्चों के इस क्रिटिकल केयर प्रोजेक्ट को जल्द जमीन पर उतारा जा सके।
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