मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर परियोजना के नाम पर नाबार्ड (NABARD) से लिए गए ₹13.99 करोड़ के लोन की कथित हेराफेरी और डायवर्जन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत मेसर्स निमाड़ एग्रो पार्क, उसके भागीदारों और सहयोगी फर्मों के चार परिसरों पर व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया।
तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं और आरोपियों से जुड़े चार बैंक लॉकर्स को फ्रीज करने की कार्रवाई की है।
सीबीआई कोलकाता की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई ईडी जांच
ईडी की यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की आर्थिक अपराध शाखा, कोलकाता द्वारा दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर शुरू की गई है। सीबीआई की एफआईआर में मेसर्स निमाड़ एग्रो पार्क के भागीदारों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
छापेमारी के दायरे में मुख्य फर्म के अलावा इससे जुड़ी सहयोगी कंपनियां भी शामिल रहीं:
- संबद्ध फर्में: मेसर्स बी.एस. कॉटन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स श्री राजराजेश्वर डेवलपर्स और मेसर्स श्री राजराजेश्वर वेंचर्स से जुड़े ठिकानों पर जांच टीमों ने दस्तावेज खंगाले।
परियोजना अधूरी, लोन की रकम अन्यत्र डाइवर्ट करने का आरोप
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019 में मेसर्स निमाड़ एग्रो पार्क ने सेंधवा के जामली गांव में एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर स्थापित करने के लिए नाबार्ड की ‘फूड प्रोसेसिंग फंड योजना’ के तहत ₹13.99 करोड़ का टर्म लोन हासिल किया था।
- ₹31.04 करोड़ का कुल प्रोजेक्ट: इस क्लस्टर की कुल लागत ₹31.04 करोड़ आंकी गई थी, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) से ₹10 करोड़ की ग्रांट-इन-एड (अनुदान), प्रमोटर्स का ₹7.05 करोड़ का अंशदान और नाबार्ड का ₹13.99 करोड़ का सावधि ऋण शामिल था।
- उद्देश्य से भटकाई गई राशि: एजेंसी के अनुसार, ऋण राशि का उपयोग परियोजना के निर्धारित लक्ष्यों के लिए करने के बजाय फर्जी समझौतों और लेनदेन के जरिए दूसरी कंपनियों में डाइवर्ट कर दुरुपयोग किया गया।
- खाता हुआ एनपीए: धरातल पर परियोजना पूरी नहीं हुई और समय-सीमा बढ़ाने के बावजूद ऋण की किस्तें नहीं चुकाई गईं, जिसके चलते 29 सितंबर 2024 को यह ऋण खाता गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित हो गया, जिससे नाबार्ड को ₹13.99 करोड़ का सीधा नुकसान हुआ।
मनी ट्रेल और बेनामी संपत्तियों की पड़ताल जारी
ईडी के अधिकारियों के अनुसार, सर्च ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य वित्तीय हेराफेरी के दस्तावेजी साक्ष्य जुटाना, अपराध की आय (Proceeds of Crime) से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की पहचान करना और पूरी मनी ट्रेल को ट्रेस करना है। आने वाले दिनों में संबंधित प्रमोटर्स और साझेदारों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।
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