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पार्वती परियोजना प्रभावित किसानों का फूटा गुस्सा: राजगढ़ में उचित मुआवजे को लेकर आंदोलन शुरू, आमरण अनशन की दी चेतावनी

Authentic News by Authentic News
September 16, 2026
in Chhattisgarh News, News
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राजगढ़ जिले में पार्वती परियोजना के विरोध में धरना प्रदर्शन करते और तख्तियां लेकर मुआवजे की मांग करते किसान।

image source:google.com

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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में महत्वाकांक्षी पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित किसानों का सब्र टूट गया है। परियोजना के तहत जलमग्न और अधिग्रहित होने वाली कृषि भूमि के बदले प्रशासन द्वारा दिए जा रहे मुआवजे को बेहद कम और अव्यावहारिक बताते हुए किसानों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रभावित गांवों के सैकड़ों किसानों ने धरना स्थल पर एकत्रित होकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और शासन स्तर पर नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत बाजार दर पर मुआवजा तय नहीं किया गया, तो वे सामूहिक आमरण अनशन और जल सत्याग्रह करने को बाध्य होंगे।

किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ और सिंचित जमीनें कौड़ियों के भाव छीनी जा रही हैं, जिससे कई पीढ़ियों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

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किसानों के आंदोलन की मुख्य वजहें और आरोप धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं और विस्थापितों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए:

  • दशकों पुरानी गाइडलाइन पर मूल्यांकन: किसानों का आरोप है कि भू-अर्जन के लिए तय की जा रही दरें वर्तमान बाजार मूल्य (Current Market Value) से कोसों दूर हैं। सिंचित और दो-फसली जमीन का मूल्यांकन भी असिंचित भूमि की तरह किया जा रहा है।
  • पुनर्वास और रोजगार नीति का अभाव: डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के मकानों, कुओं, ट्यूबवेल, फलदार पेड़ों और बाड़ों का पारदर्शी सर्वे नहीं किया गया है। विस्थापित परिवारों के युवाओं के लिए रोजगार या समुचित पुनर्वास पैकेज का कोई ठोस खाका नहीं खींचा गया है।
  • ग्राम सभाओं की अनदेखी: किसानों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण से पूर्व पेसा एक्ट (PESA Act) और भूमि अधिग्रहण कानूनों के तहत ग्राम सभाओं की वैध सहमति के बिना ही एकतरफा कागजी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।

प्रमुख मांगें: बाजार दर से चार गुना मुआवजा और समुचित पुनर्वास आंदोलनकारी किसानों ने कलेक्टर और परियोजना अधिकारियों के समक्ष प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • पारदर्शी पुनर्परीक्षण: सभी अधिग्रहित रकबे का नए सिरे से डिजिटल व भौतिक सर्वे कराया जाए, जिसमें कुएं, मोटर पंप और ट्यूबवेल का वास्तविक मुआवजा दर्ज हो।
  • नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू हो: नए कानून के प्रावधनों के तहत ग्रामीण क्षेत्र में प्रचलित बाजार दर का चार गुना मुआवजा प्रत्येक प्रभावित खातेदार को दिया जाए।
  • परिवार के एक सदस्य को रोजगार: जिन परिवारों की शत-प्रतिशत कृषि भूमि डूब में आ रही है, उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को सरकारी या परियोजना उपक्रम में स्थायी रोजगार दिया जाए।
  • आवासीय विस्थापन पैकेज: विस्थापित होने वाले गांवों के लिए सड़क, बिजली, पानी और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं से युक्त नई पुनर्वास कॉलोनी विकसित की जाए।

‘आर-पार की लड़ाई’ का ऐलान धरना दे रहे किसानों ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि अगले 72 घंटों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और जल संसाधन विभाग के प्रतिनिधि सीधे मौके पर आकर वार्ता नहीं करते हैं, तो आंदोलन को तहसील व जिला मुख्यालय तक विस्तारित किया जाएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि वे किसी भी सूरत में अपनी जमीन पर तब तक परियोजना का काम शुरू नहीं होने देंगे, जब तक कि न्यायसंगत हक नहीं मिल जाता।

मध्य प्रदेश के विकास प्रोजेक्ट्स, किसानों के जमीनी संघर्ष और मालवा-राजगढ़ अंचल की हर निष्पक्ष व प्रामाणिक (Authentic) रिपोर्टिंग के लिए जुड़े रहें हमारी वेबसाइट के साथ।

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