ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूखंडों के मालिकाना हक दस्तावेज तैयार करने वाली केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ (SVAMITVA Scheme) को लेकर मध्य प्रदेश के पटवारियों में उपजी चिंताओं पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सीधा संज्ञान लिया है। ड्रोन सर्वे में आ रही तकनीकी त्रुटियों, आबादी रिकॉर्ड और रजिस्ट्री प्रक्रिया (Deed of Conveyance) की कानूनी जवाबदेही को लेकर जिला स्तर पर पटवारियों द्वारा उठाई जा रही आपत्तियों के बीच मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह शासन का नीतिगत निर्णय है और पटवारियों को किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक उलझन में नहीं फंसने दिया जाएगा।
मंत्रालय में कैबिनेट बैठक से पूर्व आयोजित अनौपचारिक चर्चा में योजना की जमीनी प्रगति और प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विचार-विमर्श किया गया।
1 माह में पूरी हो रजिस्ट्री प्रक्रिया: मुख्य सचिव का सुझाव बैठक के दौरान मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने ग्रामीण हितग्राहियों तक स्वामित्व योजना के लाभ त्वरित गति से पहुंचाने पर जोर दिया:
- समय-सीमा घटेगी: मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि वर्तमान में 4 से 5 महीने लगने वाली रजिस्ट्री प्रक्रिया को घटाकर पटवारियों द्वारा 1 माह के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
- सीएम ने किया समर्थन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे पटवारियों के साथ समन्वय स्थापित करें और उन्हें आश्वस्त करें कि शासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है, ताकि रजिस्ट्री का कार्य बिना किसी हिचकिचाहट के गति पकड़ सके।
ड्रोन सर्वे और आबादी रिकॉर्ड पर पटवारियों की आपत्तियां प्रदेश के कई जिलों में पटवारी संघों ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर अपनी व्यावहारिक समस्याएं सामने रखी थीं:
- तकनीकी त्रुटियों की जवाबदेही: पटवारियों का कहना था कि ड्रोन कैमरों द्वारा किए गए भौगोलिक सर्वेक्षण (Drone Survey) और वास्तविक आबादी भूमि के रिकॉर्ड में कई जगह विसंगतियां सामने आई हैं। उनका सवाल था कि भविष्य में यदि कोई सीमा विवाद या त्रुटि सामने आती है, तो उसकी जवाबदेही किस पर तय होगी?
- रजिस्ट्री अधिकार और कन्वेयंस डीड: पटवारी ‘डीड ऑफ कन्वेयंस’ के तहत रजिस्ट्री अधिकार दिए जाने और उससे जुड़े कानूनी पचड़ों को लेकर आशंकित थे।
स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री खर्च वहन करेगी सरकार हितग्राहियों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है:
- निःशुल्क रजिस्ट्री: स्वामित्व योजना के तहत बनाए जाने वाले भू-स्वामित्व दस्तावेजों की रजिस्ट्री और स्टाम्प ड्यूटी का पूरा खर्च मध्य प्रदेश सरकार स्वयं वहन कर रही है। ग्रामीणों को इसके लिए अपनी जेब से कोई शुल्क नहीं देना होगा।
- अब तक का रिकॉर्ड: प्रदेश में योजना के तहत अब तक 68 लाख से अधिक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें लगभग 50,000 निजी संपत्तियों के रिकॉर्ड शामिल हैं।
मुख्यमंत्री के इस रुख से स्पष्ट है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों के आधिकारिक डिजिटलीकरण और कानूनी अभिलेख सौंपने की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
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