स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनाने के राष्ट्रीय संकल्प में ‘डिजिटल बदलाव’ देश की सबसे मजबूत रीढ़ बनकर उभरा है। बीते एक दशक में भारत ने डिजिटल स्पेस में जो लंबी छलांग लगाई है, उसने न केवल शासन और नागरिक के बीच की दूरी को मिटाया है, बल्कि देश को दुनिया में डिजिटल इनोवेशन और सार्वजनिक तकनीकी अवसंरचना (Digital Public Infrastructure – DPI) का सिरमौर बना दिया है।
आज ‘नया भारत’ केवल तकनीकी उपभोग करने वाला देश नहीं, बल्कि 30 ट्रिलियन डॉलर की समावेशी, उत्पादक और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की नींव रखने वाला वैश्विक मार्गदर्शक बन रहा है।
डिजिटल बदलाव के तीन मजबूत स्तंभ
1. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और वित्तीय समावेशन
- इंडिया स्टैक और यूपीआई का दबदबा: आधार, जनधन और मोबाइल (JAM ट्रिनिटी) ने देश के अंतिम व्यक्ति को औपचारिक वित्तीय तंत्र से जोड़ा। यूपीआई (UPI) के जरिए आज वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन का एक बड़ा हिस्सा भारत में हो रहा है।
- DPI 2.0 का नया रोडमैप: नीति आयोग द्वारा पेश किए गए दीर्घकालिक डिजिटल खाके के तहत देश अब बुनियादी कल्याणकारी वितरण से आगे बढ़कर आजीविका, एमएसएमई, कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने (Productivity-Led Growth) के नए चरण में प्रवेश कर चुका है।
2. पारदर्शी सुशासन और बिचौलियों का खात्मा
- डीबीटी (DBT) से लीकेज पर रोक: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए छात्रवृत्ति, किसान सम्मान निधि और सामाजिक सुरक्षा पेंशन सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है।
- जमीनी रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण: स्वामित्व योजना जैसी पहलों ने ड्रोन तकनीक और सैटेलाइट मैपिंग के जरिए गांवों में आवासीय संपत्तियों के सटीक अधिकार अभिलेख तैयार कर करोड़ों परिवारों को संपत्ति विवादों से मुक्ति और कानूनी सुरक्षा दी है।
3. फ्रंटियर टेक्नोलॉजी: AI, 5G और सेमीकंडक्टर मिशन
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का लोकतंत्रीकरण: ‘भाषिणी’ जैसे ओपन-सोर्स भाषा मंचों के माध्यम से स्थानीय भाषाओं में डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाया जा रहा है, जिससे भाषा की सीमा समाप्त हो रही है।
- हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और विनिर्माण: देश के 95% से अधिक हिस्सों में 5G का सबसे तेज रोलआउट और ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के जरिए घरेलू चिप निर्माण को गति देकर भारत तकनीकी रूप से संप्रभु बनने की दिशा में अग्रसर है।
विकसित भारत @2047 की राह में चुनौतियां और समाधान
इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई अहम चुनौतियों पर भी नीतिगत स्तर पर तेजी से काम हो रहा है:
- डिजिटल विभाजन (Digital Divide) पाटना: सुदूर ग्रामीण और जनजातीय अंचलों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड व 5G नेटवर्क की पहुंच सुनिश्चित करना।
- साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून (DPDP Act) के कड़े क्रियान्वयन के साथ नागरिकों के डेटा और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना।
- कार्यबल का री-स्किलिंग: युवाओं को एआई, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकी कौशल में दक्ष बनाना ताकि वे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहें।
तकनीक, पारदर्शिता और नागरिक सशक्तिकरण का यह संगम साबित करता है कि वर्ष 2047 का विकसित भारत केवल एक आर्थिक परिकल्पना नहीं, बल्कि सवा सौ करोड़ नागरिकों के साझा प्रयास से आकार ले रही एक ठोस वास्तविकता है।
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