मध्य प्रदेश को नवीन और नवकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में एक और बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी मौजूदगी में ‘एग्रीवोल्टाइक परियोजना’ (Agrivoltaic Project) के लिए एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए अब मध्य प्रदेश के किसान एक ही जमीन पर एक साथ खेती भी कर सकेंगे और सौर ऊर्जा (Solar Energy) का उत्पादन कर बिजली भी बेच सकेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी।
क्या है एग्रीवोल्टाइक तकनीक और कैसे बदलेगी किसानों की किस्मत? एग्रीवोल्टाइक एक ऐसी आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें कृषि भूमि पर एक निश्चित ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं। इन पैनल्स के नीचे खाली बची जमीन पर पारंपरिक रूप से फसलों, सब्जियों या औषधीय पौधों की खेती की जाती है। इस परियोजना के तहत सोलर पैनल्स से बनने वाली बिजली को सीधे ग्रिड को बेचा जाएगा, जिससे किसानों को खेती से होने वाली आय के अलावा हर महीने सौर ऊर्जा से एक निश्चित और बंपर ‘अतिरिक्त आमदनी’ (Extra Income) प्राप्त होगी। साथ ही, सोलर पैनल्स के आंशिक साए से कुछ फसलों को तेज धूप से सुरक्षा मिलेगी और जमीन में नमी बरकरार रहने से पानी की भी भारी बचत होगी।
“किसान अब अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जादाता भी बनेंगे” – मुख्यमंत्री एमओयू (MoU) हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को पूरा करने में यह तकनीक मील का पत्थर साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नवोन्मेषी प्रयास से मध्य प्रदेश के किसान अब सिर्फ ‘अन्नदाता’ नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ भी बनेंगे। सरकार इस परियोजना के पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ चुनिंदा जिलों में इसे लागू करेगी, जिसके बाद व्यापक स्तर पर पूरे प्रदेश के किसानों को इस योजना से जोड़ा जाएगा और उन्हें सोलर पंप व उपकरणों के लिए विशेष सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी।

















