मध्य प्रदेश में बहुप्रतीक्षित तबादला नीति-2026 के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों की तय समय-सीमा 15 जून की आधी रात को समाप्त हो गई है। डेडलाइन खत्म होते ही प्रदेश में एक बार फिर तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध लौट आया है。 आखिरी दिन यानी सोमवार की रात को मंत्रालय (वल्लभ भवन) में अजीब अफरातफरी का माहौल देखा गया। कई विभागों के मंत्री और आला अफसर आधी रात तक सूचियों को अंतिम रूप देने में जुटे रहे, लेकिन इसके बावजूद कई विभागों के लेटलतीफ अफसर हाथ मलते रह गए और उनकी सूचियां जारी नहीं हो सकीं। अब इन अटके हुए तबादलों को अमलीजामा पहनाने के लिए ‘बैक डेट’ (पुरानी तारीख) का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पाले में है।
आधी रात का हाई-वोल्टेज ड्रामा और बैक-डेट की कशमकश
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की गाइडलाइन के अनुसार, 1 जून से 15 जून तक ही ई-ऑफिस (e-office) के माध्यम से ऑनलाइन तबादला आदेश जारी करने की अनुमति थी और इसके बाद जारी होने वाले आदेश स्वतः शून्य माने जाएंगे। आखिरी रात को स्कूल शिक्षा, राजस्व, गृह और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी जैसे बड़े विभागों में सूचियों को लेकर भारी खींचतान चलती रही। जो रसूखदार और सक्रिय अधिकारी थे, उनके आदेश तो रात 12 बजे से पहले डिजिटल हस्ताक्षर के साथ पोर्टल पर अपलोड हो गए। परंतु, समन्वय की कमी और लेटलतीफी के शिकार कई महकमों की सूचियां मंत्रियों के पास ही अटकी रह गईं। सूत्रों का कहना है कि अब इन सूचियों को 15 जून की ही तारीख में (बैक डेट) एडजस्ट करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, जिस पर तकनीकी और प्रशासनिक पेंच फंस गया है।
क्या आज कैबिनेट बैठक में तारीख बढ़ाने पर होगी चर्चा?
तबादलों की म्याद खत्म होने के तुरंत बाद आज (16 जून) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में कैबिनेट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बेहद गर्म है कि कई मंत्रियों और विधायकों के भारी दबाव के चलते क्या आज कैबिनेट में तबादलों की अंतिम तिथि को 7 से 10 दिनों के लिए आगे बढ़ाने पर विचार हो सकता है? कई जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि इस बार 15 दिनों की बेहद छोटी विंडो मिलने के कारण कई जरूरी और प्रशासनिक रूप से आवश्यक तबादले छूट गए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री सचिवालय इस बात को लेकर बेहद सख्त है कि नीतिगत पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-सीमा न बढ़ाई जाए। यदि आज कैबिनेट में इस पर हरी झंडी नहीं मिलती है, तो छूटे हुए मामलों के लिए मंत्रियों को सीधे मुख्यमंत्री (CM) समन्वय से विशेष मंजूरी लेनी होगी।

















