मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के जिला कलेक्टर शिवम वर्मा के एक संवेदनशीलता भरे फैसले ने समाज के सबसे वंचित तबके के 40 मासूम बच्चों के भविष्य को अंधकार में डूबने से बचा लिया है। प्रशासनिक जटिलताओं और दस्तावेज़ों की कमी के कारण जो बच्चे स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच पा रहे थे, उन्हें कलेक्टर की अनूठी पहल से न सिर्फ नया जीवन मिला है, बल्कि शिक्षा का अधिकार (RTE) भी सुनिश्चित हुआ है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने संज्ञान लेते हुए इन सभी 40 बच्चों के तत्काल जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificates) जारी करवाए और इसके तुरंत बाद शिक्षा विभाग को निर्देशित कर सभी का नामी स्कूलों में दाखिला (School Admission) भी सुनिश्चित कराया।
दस्तावेज़ों की कमी बन रही थी पढ़ाई में रोड़ा
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ये सभी बच्चे इंदौर के विभिन्न झुग्गी-झोपड़ियों, ईंट-भट्टों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले अत्यंत गरीब और खानाबदोश परिवारों से ताल्लुक रखते हैं।
- अभिभावकों की लाचारी: इन बच्चों के माता-पिता बेहद अशिक्षित और जागरूक न होने के कारण समय पर बच्चों का जन्म पंजीकरण (Birth Registration) नहीं करा पाए थे।
- दाखिले से इनकार: जब ये परिवार बच्चों के एडमिशन के लिए स्कूलों के चक्कर काट रहे थे, तो अनिवार्य दस्तावेज़ (विशेषकर जन्म प्रमाण पत्र) न होने के कारण उन्हें प्रवेश देने से साफ मना कर दिया जा रहा था। ऐसे में इन बच्चों का भविष्य स्कूल जाने की उम्र में भी अधर में लटका हुआ था।
कलेक्टर ने ऑन-द-स्पॉट दिए निर्देश, कैंप लगाकर बने सर्टिफिकेट
यह मामला जैसे ही इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के संज्ञान में आया, उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया। कलेक्टर ने इसे केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता न मानकर बच्चों के मौलिक अधिकार से जुड़ा मामला माना:
- स्पेशल टास्क: कलेक्टर ने नगर निगम और महिला एवं बाल विकास विभाग की एक संयुक्त टीम को इन बच्चों के वेरिफिकेशन का जिम्मा सौंपा।
- त्वरित कार्रवाई: सभी वैधानिक प्रक्रियाएं और औपचारिकताएं रिकॉर्ड समय में पूरी की गईं और बिना किसी देरी के डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर सीधे उनके माता-पिता को सौंपे गए।
सिर्फ कागज़ नहीं, सीधे मिला स्कूल का प्रवेश पत्र
इंदौर कलेक्टर यहीं नहीं रुके; प्रमाण पत्र जारी होने के तुरंत बाद उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को कड़े निर्देश दिए कि इन सभी 40 बच्चों की रुचि और उनके निवास स्थान के सबसे नजदीकी शासकीय व निजी स्कूलों में ‘राइट टू एजुकेशन’ (RTE) के नियमों के तहत तुरंत सीटें अलॉट की जाएं।
आज जब इन बच्चों को उनकी नई स्कूल यूनिफॉर्म, किताबें और बैग के साथ स्कूल में प्रवेश मिला, तो उनके और उनके माता-पिता के चेहरों पर खुशी के आंसू छलक आए। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कलेक्टर शिवम वर्मा के इस ‘सिटिजन सेंट्रिक’ और मानवीय दृष्टिकोण की जमकर तारीफ की है।












