सनातन धर्म में ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा का पर्व इस बार बेहद खास और अद्वितीय होने जा रहा है। इस वर्ष गंगा दशहरा पर अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) और नौतपा का एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, ग्रहों और नक्षत्रों की यह विशेष जुगलबंदी कई दशकों बाद देखने को मिल रही है, जिसके कारण इस दिन किए जाने वाले स्नान, तप और दान का पुण्य फल हजार गुना अधिक प्राप्त होगा। नौतपा के बीच गंगा मैया के अवतरण का यह दिन शीतलता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम है।
इस पावन मुहूर्त में करें स्नान और दान हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस महायोग के दिन पुण्य सलिला गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दोपहर तक का समय सर्वोत्तम माना गया है।
- स्नान का उत्तम मुहूर्त: सुबह 04:15 बजे से सुबह 06:00 बजे तक (ब्रह्म मुहूर्त) और इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक रहेगा।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन दान में संख्या ’10’ का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं को 10 की संख्या में ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को सत्तू, मटका, पंखा, खरबूजा, वस्त्र और अन्न का दान करना चाहिए, जिससे जीवन के सभी 10 प्रकार के पापों (कायिक, वाचिक और मानसिक) से मुक्ति मिलती है।
अधिकमास और नौतपा से बढ़ा महत्व नौतपा के कारण जहां सूर्य देव अपने पूर्ण ताप पर होते हैं, वहीं अधिकमास (भगवान विष्णु का प्रिय महीना) का साथ मिलने से इस दिन का महत्व अनंत हो गया है। भीषण गर्मी के बीच जल स्रोतों की पूजा करना और राहगीरों को ठंडा जल पिलाना इस समय सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। अधिकमास के प्रभाव से इस दिन की गई श्री हरि और माँ गंगा की आराधना कुंडली के पितृ दोष और सूर्य दोष को हमेशा के लिए शांत कर देती है।



















