लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों और अभिभावकों के नाम एक बेहद अनूठा और भावुक खुला खत लिखा है। इस पत्र को ‘योगी की पाती’ नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बच्चों को ‘योगी अंकल’ के रूप में संबोधित करते हुए इन छुट्टियों को सिर्फ मोबाइल और रील्स की स्क्रीन पर बर्बाद न करने, बल्कि इन्हें संस्कार, कौशल और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की एक बड़ी और मार्मिक अपील की है।
नानी-दादी के घर जाकर सीखें संस्कार सीएम योगी ने अभिभावकों से विशेष आग्रह किया है कि वे इस बार बच्चों को ननिहाल (नाना-नानी) और ददिहाल (दादा-दादी) जरूर लेकर जाएं। उन्होंने अपनी पाती में लिखा, “बुजुर्गों की छत्रछाया में रहकर बच्चे जो जीवन मूल्य, कहानियां और परंपराएं सीखेंगे, वह उन्हें दुनिया की किसी भी किताब या स्कूल में नहीं सिखाई जा सकती।” मुख्यमंत्री ने किशोरों और युवाओं को इन छुट्टियों में कोई नई भाषा सीखने, बागवानी करने, किताबें पढ़ने, चित्रकारी, संगीत और कतरनिया घाट या दुधवा नेशनल पार्क जैसे प्राकृतिक स्थलों पर जाकर प्रकृति से जुड़ने की सलाह दी है।
सिंगल यूज प्लास्टिक को कहें ‘ना’ पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए सीएम योगी ने इस वैकेशन को पूरी तरह ‘प्लास्टिक-मुक्त छुट्टियां’ बनाने का बड़ा संकल्प लेने को कहा है। उन्होंने अपील की कि चाहे आप किसी यात्रा पर जा रहे हों या पिकनिक पर, हमेशा कपड़े या जूट के थैलों का ही प्रयोग करें। प्लास्टिक का कचरा इधर-उधर न फैलाएं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए हमारे द्वारा किए गए ये छोटे-छोटे प्रयास ही आगे चलकर भविष्य में बड़े और स्थायी बदलाव का आधार बनेंगे।

















