उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अपनी नई राजनीतिक पारी का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा को अलविदा कहने वाली दिव्या मित्तल ने एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि वे सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर रही हैं और जनता के बुनियादी मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगी।
खास बात यह है कि उन्होंने किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय सीधे जनता के समर्थन से निर्दलीय (Independent) चुनाव मैदान में उतरने का संकल्प लिया है। राजनीतिक हलकों और पूर्वांचल के सियासी गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज हो गई है कि वे अपनी पूर्व कर्मभूमि मिर्जापुर से आगामी चुनावी समर में ताल ठोक सकती हैं।
मिर्जापुर से खास नाता: जब गुलाब की पंखुड़ियों से हुआ था अभिनंदन
दिव्या मित्तल का मिर्जापुर की जनता से भावनात्मक जुड़ाव किसी से छिपा नहीं है:
- लहुरियादह में पानी की क्रांति: मिर्जापुर जिलाधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हलिया ब्लॉक के दुर्गम पहाड़ी गांव लहुरियादह में आजादी के 75 साल बाद पाइपलाइन के जरिए नल से जल पहुंचाकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।
- फूलों की बारिश से भावुक विदाई: जब उनका मिर्जापुर से स्थानांतरण (ट्रांसफर) हुआ था, तब जिले की जनता, महिलाओं और युवाओं ने सड़कों पर उतरकर उनकी गाड़ी पर गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश की थी और उन्हें नम आंखों से विदाई दी थी। यह दृश्य सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।
वीडियो संदेश में राजनीतिक ऐलान: “80 सालों की नाकामियों का हिसाब मांगूंगी”
अपने 9 मिनट से अधिक लंबे वीडियो संदेश में पूर्व आईएएस ने व्यवस्था और मौजूदा राजनीतिक संस्कृति पर तीखे सवाल दागे:
- किसी दल का झंडा नहीं: दिव्या मित्तल ने कहा, “जिन झंडों के नीचे पिछले 80 सालों में आम आदमी की किस्मत नहीं बदली, उन्हीं झंडों को थामकर बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। जो खुद इस व्यवस्था का हिस्सा बन जाएगा, वह इससे हिसाब कैसे मांगेगा? इसलिए मैं बिना किसी दलीय झंडे के, सीधे जनता के साथ मिलकर राजनीति करूंगी।”
- स्कूल और फाइलों का दर्द: उन्होंने मिर्जापुर के एक गांव का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि एक महिला ने उनसे केवल 5वीं से आगे स्कूल खोलने की मांग की थी। न बजट की कमी थी और न अनुमति की, कमी थी तो सिर्फ राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की। उन्होंने कहा कि जब नीयत नहीं होती तो एक मामूली सरकारी फाइल भी पहाड़ जैसी रुकावट बन जाती है।
- जाति-धर्म की राजनीति पर प्रहार: उन्होंने स्पष्ट किया कि एक अफसर के रूप में उन्होंने कभी किसी फरियादी की जाति या मजहब नहीं देखा और राजनीति में भी वे सिर्फ इंसानियत, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास को ही अपना एजेंडा बनाएंगी।
क्या मिर्जापुर से लड़ेंगी विधानसभा चुनाव?
आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से उच्च शिक्षा प्राप्त दिव्या मित्तल के इस फैसले के बाद पूर्वांचल के समीकरणों में हलचल है:
- मिर्जापुर सदर या मझवां का विकल्प: प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि मिर्जापुर में उनकी जमीनी पकड़ और लोकप्रियता को देखते हुए वे मिर्जापुर की किसी विधानसभा सीट से अपने चुनावी सफर का आगाज कर सकती हैं।
- विकल्प की तलाश में जनता: उन्होंने डॉक्टरों, शिक्षकों, वकीलों, किसानों, नौजवानों और महिलाओं से अपील की है कि वे एक साफ-सुथरे नए राजनीतिक विकल्प के निर्माण में उनका साथ दें।
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