लगातार बढ़ती महंगाई और दैनिक उपभोग की आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। पार्टी ने ऐतिहासिक ‘नमक सत्याग्रह’ की तर्ज पर ‘चीनी सत्याग्रह’ का बिगुल फूंकते हुए एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, जमाखोरी और विफल मूल्य नियंत्रण प्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बढ़ती महंगाई ने बिगाड़ा आम जनता का बजट धरना स्थल पर जुटे वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चीनी, दाल, खाद्य तेल और रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरतों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
- चीनी की कीमतों में उछाल: नेताओं ने आरोप लगाया कि बाजार में चीनी की कृत्रिम किल्लत और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
- सरकारी नीतियों पर सवाल: कांग्रेस वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की गलत नीतियों और निर्यात-आयात के असंतुलन के कारण घरेलू बाजार में आवश्यक खाद्य पदार्थों के दाम बेकाबू हो रहे हैं।
महात्मा गांधी के सत्याग्रह की तर्ज पर संघर्ष का ऐलान कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि जिस तरह महात्मा गांधी ने आम जनता के हित के लिए नमक कानून के खिलाफ सत्याग्रह किया था, उसी भावना के साथ कांग्रेस आज हर रसोई की जरूरत यानी चीनी के मुद्दे को लेकर जनता की आवाज बनकर सड़क पर उतरी है। इस एक दिवसीय सांकेतिक धरने के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि यदि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर तत्काल अंकुश नहीं लगाया गया और जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी इस आंदोलन को ब्लॉक स्तर से लेकर संसद तक और अधिक उग्र रूप देगी।
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