लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा, छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने और पर्यावरण संरक्षण की मांगों को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में डटे प्रख्यात पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के ऐतिहासिक अनशन का आज 19वां दिन है। हाड़ कंपा देने वाले मौसम और लगातार गिरते स्वास्थ्य के बावजूद वांगचुक और उनके साथ बैठे लद्दाखी प्रदर्शनकारियों के हौसले डिगने का नाम नहीं ले रहे हैं।
चिकित्सकों द्वारा लगातार अनशन खत्म करने की दी जा रही चेतावनियों के बीच सोनम वांगचुक ने एक बार फिर केंद्र सरकार को अपनी दृढ़ता का संदेश दिया है। उन्होंने बेहद कमजोर आवाज लेकिन मजबूत इरादों के साथ कहा, “यह लड़ाई लद्दाख की मिट्टी और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की है। मेरा शरीर भले ही कमजोर हो रहा हो, लेकिन मानसिक रूप से मैं अभी कई दिन और चल सकता हूँ।”
19 दिनों से सिर्फ पानी और नमक पर जिंदा; मेडिकल बुलेटिन में चिंता
सोनम वांगचुक दिल्ली के लद्दाख भवन/निर्धारित विरोध स्थल पर अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ 24 घंटे खुले आसमान के नीचे अनशन पर बैठे हैं:
- तेजी से गिर रहा है वजन: डॉक्टरों की टीम द्वारा जारी ताजा मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, 19 दिनों से अन्न का एक भी दाना न लेने के कारण वांगचुक का वजन 6 किलो से अधिक घट गया है और उनका ब्लड शुगर लेवल तथा वाइटल पैरामीटर्स चिंताजनक स्तर पर पहुंच गए हैं।
- अस्पताल जाने से इनकार: डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती करने की सलाह दी है, लेकिन वांगचुक ने चिकित्सा सहायता लेने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक सरकार लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल के साथ सार्थक बातचीत शुरू नहीं करती, उनका यह सत्याग्रह जारी रहेगा।
क्या हैं सोनम वांगचुक और लद्दाख की मुख्य मांगें?
लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाए जाने के बाद से ही वहां के स्थानीय लोग अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। वांगचुक इस आंदोलन के जरिए मुख्य रूप से 4 मांगें उठा रहे हैं:
- छठी अनुसूची का कवच: लद्दाख की 90% से अधिक आबादी जनजातीय है। उन्हें डर है कि कॉर्पोरेट और बाहरी लोग वहां आकर उनकी जमीनों और संसाधनों पर कब्जा कर लेंगे। छठी अनुसूची के तहत लद्दाख को विशेष स्वायत्तता और जमीन के संरक्षण का अधिकार मिलेगा।
- पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य की मांग की जा रही है ताकि वहां की अपनी चुनी हुई विधानसभा हो।
- रोजगार और प्रतिनिधित्व: स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण और संसद में लद्दाख के लिए दो लोकसभा सीटों की मांग।
- ग्लेशियरों का संरक्षण: हिमालयी क्षेत्र और लद्दाख के संवेदनशील ग्लेशियरों को औद्योगिक खनन (Mining) से बचाना।
देशभर से मिल रहा समर्थन; सोशल मीडिया पर मुहिम तेज
सोनम वांगचुक के 19वें दिन भी अनशन पर डटे रहने की खबर के बाद दिल्ली के विभिन्न छात्र संगठनों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और राजनैतिक दलों के नेताओं का लद्दाख भवन पहुंचना जारी है। सोशल मीडिया पर भी #SaveLadakh और #SonamWangchuk ट्रेंड कर रहा है।
विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ‘चुप्पी’ पर सवाल खड़े किए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे गांधीवादी तरीके से अपनी बात रख रहे हैं और जब तक गृह मंत्रालय की ओर से लद्दाख के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय वार्ता (High-Level Dialogue) की तारीख तय नहीं हो जाती, यह अनशन किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं लिया जाएगा।












