मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को लेकर लंबे समय से चले आ रहे जाति प्रमाण पत्र विवाद में आज एक बहुत बड़ा और निर्णायक मोड़ आ गया है। प्रदेश की उच्च स्तरीय छानबीन समिति (High-Level Scrutiny Committee) ने गहन जांच और सभी कानूनी दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के बाद अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। समिति ने मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति (SC) के प्रमाण पत्र को पूरी तरह से सही और वैध ठहराया है।
इस फैसले के साथ ही पिछले कई महीनों से विपक्षी दलों और शिकायतकर्ताओं द्वारा उनके खिलाफ लगाए जा रहे फर्जीवाड़े (Fake Caste Certificate) के सभी आरोपों को समिति ने सिरे से खारिज कर दिया है। इस क्लीन चिट के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) खेमे और मंत्री के समर्थकों में जश्न का माहौल है।
क्या था पूरा विवाद और किन बिंदुओं पर हुई छानबीन?
प्रतिमा बागरी ने सतना जिले की रैगांव (अजा) विधानसभा सीट से चुनाव जीता था और वर्तमान में वे राज्य मंत्री हैं। विपक्ष ने उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि उनका जाति प्रमाण पत्र नियमों के विरुद्ध और कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है।
- समिति की विस्तृत जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए यह केस राज्य की उच्च स्तरीय छानबीन समिति को सौंपा गया था। समिति ने उनके पैतृक गांव, पारिवारिक राजस्व रिकॉर्ड, स्कूल दाखिला पंजी और वंशावली से जुड़े दशकों पुराने मूल दस्तावेजों की बारीक जांच की।
- नियमों के तहत पाया गया वैध: समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र जारी करने में सभी तय वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और वे पूरी तरह से उस आरक्षित श्रेणी के अंतर्गत आती हैं, जिसका उन्होंने दावा किया था।
“सत्य की जीत हुई, राजनीति के लिए लगाया गया था झूठा लांछन” — प्रतिमा बागरी
छानबीन समिति से क्लीन चिट मिलने के बाद राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने राहत की सांस ली और विपक्ष पर तीखा पलटवार किया।
मंत्री प्रतिमा बागरी ने भावुक होते हुए कहा: “मुझे हमेशा से देश के कानून और प्रशासनिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा था। विपक्ष के पास मेरे खिलाफ कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं था, इसलिए उन्होंने एक महिला जनप्रतिनिधी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और बदनाम करने के लिए यह घटिया और झूठा लांछन लगाया था। आज छानबीन समिति के फैसले ने साबित कर दिया है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं।”
राजनैतिक हलकों में हलचल; भाजपा का कांग्रेस पर हमला
इस फैसले के आते ही भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि कांग्रेस हमेशा से दलित और पिछड़े वर्ग से आने वाले उभरते हुए नेताओं को निशाना बनाती रही है। इस फैसले के बाद कांग्रेस को सार्वजनिक रूप से मंत्री प्रतिमा बागरी और रैगांव की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस क्लीन चिट के बाद अब प्रतिमा बागरी की स्थिति कैबिनेट और उनके विधानसभा क्षेत्र में पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी और वे बिना किसी राजनैतिक दबाव के अपने विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।











