भोपाल में 700 खिलाड़ियों से चुपचाप वसूली गई मोटी रकम! सरकारी दावों की उड़ीं धज्जियां; वुशु चैंपियनशिप में खेल के नाम पर हुआ बड़ा ‘खेल’; खाना और रहना था पूरी तरह फ्री, फिर किसके इशारे पर जेब से ऐंठे गए ₹2000?
भोपाल (Authentic News खेल व विशेष जांच डेस्क): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से खेल जगत को शर्मसार कर देने वाला एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अफसरों की नींद उड़ा दी है। राजधानी में आयोजित 25वीं राज्य स्तरीय वुशु चैंपियनशिप (25th State Wushu Championship) में प्रदेशभर से पसीना बहाने पहुंचे 700 से अधिक युवा खिलाड़ियों के साथ कथित तौर पर ऐसा ‘आर्थिक खेल’ खेल दिया गया, जिसकी भनक लगते ही खेल गलियारों में हड़कंप मच गया है।
नियमों के तहत सरकारी दिशा-निर्देशों में प्रतियोगिता के दौरान सभी प्रतिभागियों के लिए भोजन, नाश्ता और ठहरने की व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क (Free Food & Stay) तय की गई थी। लेकिन इसके बावजूद मैदान पर उतरने से पहले प्रत्येक खिलाड़ी से ₹2,000-₹2,000 की नकद वसूली कर ली गई।
₹14 लाख से ज्यादा की अवैध उगाही? जानिए अंदर का खेल
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आए विभिन्न जिलों के खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों ने जो खुलासे किए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं:
- 700 से अधिक खिलाड़ियों से वसूली: टूर्नामेंट में प्रदेश के अलग-अलग संभागों और जिलों से 700 से अधिक जूनियर व सब-जूनियर वुशु एथलीट पहुंचे थे। आरोप है कि लगभग हर खिलाड़ी से बिना किसी वैध रसीद या औपचारिक स्पष्टीकरण के दो-दो हजार रुपये जबरन ऐंठे गए।
- सीधे ₹14 लाख से अधिक का हेरफेर: अगर आंकड़ों का हिसाब लगाया जाए, तो मुफ्त सुविधाओं के नाम पर आयोजन समिति या बिचौलियों द्वारा करीब 14 लाख से 15 लाख रुपये की काली कमाई खड़े-खड़े कर ली गई।
- मना करने पर बाहर करने की धमकी: कई खिलाड़ियों और कोचों ने दबी जुबान में बताया कि जब उन्होंने इस अवैध शुल्क का विरोध किया, तो उन्हें टूर्नामेंट के ड्रॉ और मैचों से बाहर का रास्ता दिखाने की धमकी दी गई, जिसके डर से गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले खिलाड़ियों ने चुपचाप पैसे चुका दिए।
बदइंतजामी की इंतहा: पैसे लेने के बाद भी फर्श पर सोने को मजबूर!
चौंकाने वाली बात यह है कि ₹2,000 की अतिरिक्त वसूली के बावजूद आयोजन स्थल पर खिलाड़ियों के लिए बुनियादी व्यवस्थाएं तक नदारद पाई गईं:
- ठंडे फर्श पर गुजारी रात: कई जिलों से आई बालिकाओं और खिलाड़ियों को घटिया हॉल और ठंडे फर्श पर सोने को मजबूर किया गया।
- भोजन की गुणवत्ता पर सवाल: खेल अधिकारियों के बड़े-बड़े दावों के विपरीत खिलाड़ियों को दिए गए भोजन की गुणवत्ता बेहद दोयम दर्जे की बताई गई, जिसे लेकर मौके पर कई बार खिलाड़ियों और आयोजकों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
खेल विभाग में मचा हड़कंप, जांच की उठी मांग
इस पूरे घोटाले के उजागर होते ही मध्य प्रदेश के खेल संघों और प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है:
- संघ के पदाधिकारियों पर उठी उंगली: सवाल यह उठ रहा है कि जब खेल प्रतियोगिताओं के लिए बाकायदा बजट आवंटित होता है और सुविधाएं मुफ्त घोषित होती हैं, तो एसोसिएशन के किन प्रभावशाली पदाधिकारियों की शह पर यह वसूली रैकेट चल रहा था?
- अभिभावकों की सीधी मांग: पीड़ित खिलाड़ियों के अभिभावकों ने खेल मंत्री और खेल संचालक से इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और खिलाड़ियों का पैसा तुरंत लौटाने की मांग की है।
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