मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के तीन प्रमुख राज्यों—मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मानसूनी गतिविधियों पर अचानक ब्रेक लग गया है। जहां मध्य प्रदेश के पश्चिमी और मध्य संभागों में बादलों के छंटने से सूखे जैसे हालात बन रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से बारिश का दायरा बेहद सीमित होकर सुस्त पड़ गया है। उधर, राजस्थान में कमजोर मानसूनी हवाओं के कारण दिन का पारा 39 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और लोग भीषण उमस भरी गर्मी से बेहाल हैं।
हालांकि, राहत की बात यह है कि मौसम विभाग (IMD) ने 12 सितंबर से तीनों राज्यों में एक बार फिर मानसून के सक्रिय होने का मजबूत पूर्वानुमान जारी किया है।
11 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में बनेगा नया सिस्टम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में कोई भी प्रभावी मानसूनी ट्रफ या चक्रवाती तंत्र सक्रिय न होने के कारण बारिश थमी हुई है।
- नया कम दबाव का क्षेत्र: पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 11 सितंबर को एक नया लो-प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) बनने जा रहा है।
- उत्तर-पश्चिम दिशा में मूवमेंट: यह मानसूनी तंत्र धीरे-धीरे ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ होते हुए मध्य प्रदेश व पूर्वी राजस्थान की तरफ आगे बढ़ेगा, जिससे 12 सितंबर से भारी से मध्यम बारिश का नया दौर शुरू होगा।
तीनों राज्यों में 12 सितंबर से ऐसा रहेगा असर:
- मध्य प्रदेश (MP): 11 सितंबर तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में तेज धूप और छिटपुट बूंदाबांदी की ही स्थिति रहेगी। 12 सितंबर से नए सिस्टम के प्रवेश करते ही पूर्वी मध्य प्रदेश—छतरपुर, पन्ना, दमोह, कटनी, जबलपुर, रीवा और सागर संभाग में भारी बारिश की चेतावनी है, जिसके बाद पश्चिमी मध्य प्रदेश (इंदौर, उज्जैन, भोपाल) में भी बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी।
- छत्तीसगढ़ (CG): छत्तीसगढ़ में 10 सितंबर से ही बादलों की वापसी शुरू हो जाएगी। सरगुजा संभाग में पहले बारिश होगी, जिसके बाद 11 और 12 सितंबर को रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के अधिकांश इलाकों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा।
- राजस्थान (Rajasthan): बारिश न होने के कारण श्रीगंगानगर, फलोदी, बीकानेर और जोधपुर में गर्मी का सितम चरम पर है। 12 सितंबर से बंगाल की खाड़ी के सिस्टम के असर से पूर्वी राजस्थान (कोटा, भरतपुर, जयपुर, दौसा और धौलपुर) में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ मध्यम से तेज बारिश शुरू होगी, जिससे तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरावट दर्ज होगी। हालांकि पश्चिमी राजस्थान में विदाई के पूर्व मौसम मुख्यतः शुष्क ही रहने के आसार हैं।
किसानों के लिए यह आगामी मानसूनी स्पेल खरीफ की फसलों (सोयाबीन, धान, मक्का) के पकने और अंतिम सिंचाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
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