मध्य प्रदेश न्यायपालिका के शीर्ष पद पर नई नियुक्ति के साथ राज्य को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। गुजरात उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे (Justice Alpesh Yeshvant Kogje) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 30वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे। राजधानी भोपाल स्थित राजभवन के सांदीपनि सभागार में गुरुवार, 10 सितंबर को गरिमामय शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जहां राज्यपाल मंगूभाई पटेल उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अनुमोदन के बाद विधि एवं न्याय मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
राजभवन में होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह
समारोह के लिए राजभवन और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं:
- गरिमामयी उपस्थिति: शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, विधानसभा अध्यक्ष, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री, महाधिवक्ता और राज्य के शीर्ष प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
- समारोह का समय: 10 सितंबर की सुबह राजभवन में आयोजित संक्षिप्त व भव्य कार्यक्रम में औपचारिक रूप से शपथ ग्रहण संपन्न कराया जाएगा।
जस्टिस ए. वाई. कोगजे का न्यायिक सफर
- जन्म एवं प्रारंभिक वकालत: 16 जुलाई 1969 को जन्मे जस्टिस कोगजे ने महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (MSU), बड़ौदा से विज्ञान और विधि (LL.B.) की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 1993 में बार काउंसिल जॉइन कर अपनी वकालत शुरू की।
- सरकारी अधिवक्ता व विशेष अभियोजक: वे वर्ष 2001 में असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और 2002 से 2007 तक एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रहे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी (SIT) की ओर से वे विशेष लोक अभियोजक भी नियुक्त रहे।
- हाईकोर्ट जज के रूप में पदोन्नति: 6 अप्रैल 2016 को उन्हें गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और 15 मार्च 2018 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया। सिविल, आपराधिक, राजस्व और संवैधानिक मामलों में उनके प्रभावी फैसलों को विशेष पहचान मिली है।
मध्य प्रदेश में न्यायिक प्राथमिकताओं पर रहेगा जोर
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण करने के बाद जस्टिस कोगजे जबलपुर स्थित मुख्य पीठ के साथ ही इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों के न्यायिक व प्रशासनिक तंत्र का नेतृत्व करेंगे। उनके समक्ष निचली अदालतों में लंबित प्रकरणों के त्वरित निपटान, जिला न्यायालयों के बुनियादी ढांचे के विस्तार और डिजिटल न्याय प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने जैसी अहम प्राथमिकताएं होंगी।
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