छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में सुरक्षाबलों ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत एक सुनियोजित कार्रवाई को अंजाम दिया। सुकमा और बीजापुर जिलों की सरहद पर स्थित घने जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच कई घंटों तक गोलीबारी चली। इस मुठभेड़ में अब तक 14 नक्सलियों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई अन्य के घायल होने की संभावना है।
मुठभेड़ और बरामदगी
सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम (DRG, STF और CRPF) को सूचना मिली थी कि सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों की एक बड़ी टुकड़ी मौजूद है। जैसे ही जवान इलाके की घेराबंदी करने पहुँचे, नक्सलियों ने उन पर हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में 14 नक्सली मारे गए। घटनास्थल से भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक सामग्री और दैनिक उपयोग का सामान बरामद किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ मोस्ट वांटेड नक्सली देवा बारसे का सरेंडर रहा। देवा बारसे, जो पिछले कई सालों से बस्तर के इलाकों में सक्रिय था और जिस पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था, ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया।
- क्यों अहम है यह सरेंडर? देवा बारसे नक्सली संगठन की रणनीतियों और उनके ठिकानों की गहरी जानकारी रखता है। उसका सरेंडर करना यह दर्शाता है कि अब नक्सलियों के भीतर भी विचारधारा को लेकर फूट पड़ रही है और वे सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के आगे कमजोर महसूस कर रहे हैं।
- प्रभाव: सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देवा बारसे से मिलने वाली जानकारी भविष्य के ऑपरेशनों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है।
बस्तर आईजी (IG) और एसपी (SP) ने पुष्टि की है कि क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने इस सफल ऑपरेशन के लिए जवानों की बहादुरी की सराहना की है। सरकार की ‘पुनर्वास नीति’ और विकास कार्यों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है, जिसके कारण न केवल नक्सली ढेर हो रहे हैं, बल्कि बड़े कैडर के लोग आत्मसमर्पण भी कर रहे हैं।

















