मध्य प्रदेश में रेंटल कारों के नाम पर धोखाधड़ी और अवैध खरीद-फरोख्त करने वाले एक बेहद शातिर और संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस बड़े ‘कार रेंटल स्कैम’ के मुख्य सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह आम लोगों से ट्रैवल एजेंसी या कॉपोर्रेट कंपनियों में लगाने के नाम पर आलीशान और महंगी कारें किराए पर लेता था, और फिर उनके जीपीएस (GPS) और फास्टैग को बंद करके उन्हें कौड़ियों के दाम बाजार में बेच या गिरवी रख देता था। फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है और करोड़ों रुपये मूल्य की अन्य लग्जरी गाड़ियों की बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
फास्टैग और जीपीएस बंद होने पर खुला फर्जीवाड़े का राज पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। शुरुआत में गाड़ी मालिकों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी एक-दो महीने का किराया समय पर दे देते थे। इसके बाद अचानक से कार मालिकों का संपर्क आरोपियों से टूट जाता था और गाड़ियों के जीपीएस ट्रैकर्स को भी डिस्कनेक्ट कर दिया जाता था। जब कुछ पीड़ित कार मालिकों ने अपने स्तर पर फास्टैग और अंतिम लोकेशन के आधार पर जांच शुरू की, तो पता चला कि उनकी गाड़ियां दूसरे जिलों और राज्यों में ग्रामीण इलाकों के लोगों के पास चल रही हैं। खरीदारों को यह झांसा दिया जाता था कि असली मालिक ने आर्थिक तंगी के कारण गाड़ी को एग्रीमेंट पर गिरवी रखा है।
30 से अधिक लग्जरी गाड़ियां रडार पर, पुलिस की टीमें रवाना शिकायत दर्ज होने के बाद हरकत में आई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के सक्रिय सदस्य को दबोच लिया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो, अर्टिगा, थार और क्रेटा जैसी कई लग्जरी गाड़ियां पहले ही जब्त कर ली हैं, जिनकी कुल कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं। पूछताछ में लगभग 30 से अधिक अन्य गाड़ियों की लिस्ट सामने आई है, जिन्हें ठिकाने लगाया गया है। फरार बिचौलियों और मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के साथ-साथ करोड़ों की बाकी गाड़ियों की तलाश में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की विशेष टीमें अन्य राज्यों के लिए रवाना कर दी गई हैं।


















