छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह बेहद भव्यता और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस गौरवशाली शैक्षणिक उत्सव में प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में विशेष तौर पर शामिल हुए। समारोह के दौरान सत्र के सफल 9 हजार 194 विद्यार्थियों को उपाधियां (डिग्रियां) प्रदान की गईं। इसके साथ ही, विभिन्न संकायों में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के हाथों स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
चिकित्सा क्षेत्र में सेवा और समर्पण का आह्वान दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी भावी डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। वहीं, मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आयुष, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करें।
विद्यार्थियों के चेहरे पर दिखी कामयाबी की चमक समारोह के दौरान दीक्षांत गाउन और पारंपरिक परिधानों में सजे विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था। डिग्री पाने वाले छात्र-छात्राओं में बड़ी संख्या आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी संकायों के ग्रेजुएट्स और पोस्ट-ग्रेजुएट्स की रही। विश्वविद्यालय के कुलपति ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आने वाले समय में नए शोध और पाठ्यक्रमों को शुरू करने की कार्ययोजना साझा की। इस गरिमापूर्ण समारोह में स्वास्थ्य मंत्री, कुलपति, कार्यपरिषद के सदस्य, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष सहित भारी संख्या में शोधार्थी और अभिभावक मौजूद रहे।

















