तमिलनाडु के ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज (Fort St. George) से सचिवालय को स्थानांतरित कर चेन्नई के तटीय इलाके फोरशोर एस्टेट (Pattinapakkam) में ₹1,200 करोड़ की लागत से बनने वाले नए एकीकृत विधानसभा-सह-सचिवालय परिसर की घोषणा के बाद राज्य का सियासी और सामाजिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। पर्यावरणविदों, मछुआरा संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों के चौतरफा विरोध और कड़े कानूनी सवालों को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C. Joseph Vijay) के नेतृत्व वाली सरकार इस योजना पर पुनर्विचार या ‘यू-टर्न’ (U-Turn) ले सकती है।
सीएम विजय द्वारा विधानसभा में 25.55 एकड़ भूमि पर 15 मंजिला आधुनिक प्रशासनिक परिसर बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी और लोक निर्माण विभाग (PWD) को डीपीआर तैयार करने के आदेश के बाद से ही इस तटीय स्थल के चयन पर सवाल उठने लगे थे।
विरोध की मुख्य वजहें: समुद्र तट, पर्यावरण और कानूनी अड़चनें फोरशोर एस्टेट को लेकर उठ रहे गंभीर आपत्तियों के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) नियमों का उल्लंघन: प्रस्तावित 25.55 एकड़ जमीन बंगाल की खाड़ी के हाई-टाइड लाइन (HTL) से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इतने संवेदनशील तटीय क्षेत्र में 20 लाख वर्ग फुट का कंक्रीट ढांचा खड़ा करना सीआरजेड (CRZ) नियमों का सीधा उल्लंघन है, जिससे चेन्नई पर चक्रवात और समुद्र के बढ़ते जलस्तर का खतरा और गहराएगा।
- 9 मछुआरा बस्तियों (Kuppams) की आजीविका पर संकट: ‘तमिलनाडु मीनावा मक्कल मुन्नेत्र संगम’ सहित प्रमुख मछुआरा संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि मुल्लिकुप्पम, श्रीनिवासपुरम, डोमिंग कुप्पम और नोचिकुप्पम जैसी 9 पारंपरिक बस्तियां इस स्थल से 1 किलोमीटर के दायरे में आती हैं। सचिवालय बनने से वीआईपी सुरक्षा, बैरिकेडिंग और पाबंदियों के चलते मछुआरों का समुद्र तक पहुंचना और आजीविका चलना असंभव हो जाएगा।
- ट्रैफिक जाम की विकराल समस्या: मायलापुर, संथोम और पट्टिनपक्कम की सड़कें पहले से ही बेहद संकरी और घनी आबादी वाली हैं। रोजाना हजारों सरकारी कर्मचारियों, मंत्रियों और आम जनता के आवागमन से दक्षिण चेन्नई की लाइफलाइन पूरी तरह ठप होने की आशंका है।
विपक्ष का तीखा हमला: ‘महंगे सीएम’ और ‘प्रॉपर्टी हितों’ का आरोप विपक्षी दलों ने इस योजना को लेकर विजय सरकार पर सीधा हमला बोला है:
- अन्नाद्रमुक (AIADMK) का ‘कॉस्टली सीएम’ तंज: अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने राज्य के भारी कर्ज का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री को “कॉस्टली सीएम” करार दिया और सवाल उठाया कि जब बुनियादी स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए फंड की कमी है, तो फिजूलखर्ची क्यों की जा रही है?
- पीएमके की ‘एडमिनिस्ट्रेटिव सिटी’ की सलाह: पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने फोरशोर एस्टेट को बेहद अनुपयुक्त बताते हुए मांग की है कि चेन्नई के बाहर आउटर रिंग रोड के पास 500 से 1,000 एकड़ में समर्पित ‘इंटीग्रेटेड एडमिनिस्ट्रेटिव सिटी’ बसाई जानी चाहिए, न कि समुद्र किनारे संकरे इलाके में।
- व्यक्तिगत हित का आरोप: कुछ आलोचकों और विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्तावित स्थल के ठीक सामने मुख्यमंत्री का निजी अपार्टमेंट है, जिसके चलते इस स्थल को नियमों को ताक पर रखकर चुना गया।
क्या बैकफुट पर आएगी विजय सरकार? सरकार की ओर से मंत्रियों ने फोर्ट सेंट जॉर्ज में जगह की कमी और एएसआई (ASI) व रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण का हवाला देकर परियोजना का बचाव जरूर किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के अनुसार सरकार कानूनी उलझनों और जनता की नाराजगी से बचना चाहती है:
- अदालती चुनौती की तैयारी: मछुआरा संगठन और पर्यावरणविद इस परियोजना के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।
- वैकल्पिक स्थलों पर फिर विचार संभव: यदि जनविरोध और कानूनी अड़चनें बढ़ती हैं, तो सरकार पूर्व में शॉर्टलिस्ट किए गए अन्य विकल्पों—जैसे गिंडी स्थित ‘हाइवेज रिसर्च स्टेशन’ (HRS) परिसर या नंदनमबक्कम/चेन्नई के बाहरी क्षेत्र—की ओर रुख कर सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति, बड़े ढांचागत फैसलों, पर्यावरण विमर्श और हर निष्पक्ष व प्रामाणिक (Authentic) रिपोर्टिंग के लिए जुड़े रहें हमारी वेबसाइट के साथ।












