मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके द्वारा मुंबई में छेड़े गए आंदोलन और सियासी घमासान के बीच प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का बड़ा बयान सामने आया है। जब उनसे यह तीखा सवाल पूछा गया कि “क्या अभिजीत दीपके अकेले ही ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा करा लेंगे या विपक्ष को साथ आना पड़ेगा?” तो वांगचुक ने स्पष्ट और दो टूक जवाब देते हुए आंदोलनों में व्यक्तिगत श्रेय के बजाय सामूहिक नैतिक बल की आवश्यकता पर बल दिया।
यूट्यूब चैनल ‘द देशभक्त’ पर एक विस्तृत साक्षात्कार के दौरान सोनम वांगचुक ने दीपके के विरोध प्रदर्शन, चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों और विपक्षी दलों की रणनीतियों पर खुलकर अपनी राय रखी।
“कोई अकेला क्यों करे? सही सोच वालों को साथ आना चाहिए” — वांगचुक
अभिजीत दीपके द्वारा अकेले मोर्चा संभालने के सवाल को खारिज करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा:
- एकजुटता सबसे जरूरी: वांगचुक ने कहा, “यह तो सवाल ही नहीं होना चाहिए कि कोई अकेला करे। कोई अकेला क्यों करे? अगर आपके अंदर नैतिक बल है कि व्यवस्था में कुछ गलत हो रहा है, तो सभी को मिलकर आवाज उठानी चाहिए। यह बहस का विषय ही नहीं होना चाहिए कि कौन आया और कौन नहीं आया।”
- सफाई के लिए सामूहिक प्रयास: उन्होंने आगे कहा, “मेरे ख्याल से जब भी कुछ गलत हो, तो समाज के सही सोच रखने वाले सभी वर्गों को एक साथ आकर उस गंदगी की सफाई करनी चाहिए।”
गीतांजलि आंग्मो बोलीं— “मुद्दे से बड़ा खुद को मानने की बीमारी है”
साक्षात्कार के दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी और एक्टिविस्ट गीतांजलि आंग्मो ने भी आंदोलनों में बिखराव और श्रेय लेने की होड़ पर चिंता जताई:
- जंतर-मंतर आंदोलन का दिया उदाहरण: उन्होंने कहा कि नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान भी यही कमी देखने को मिली थी।
- अहंकार बनाम जनहित: गीतांजलि ने कहा, “हमारे देश में यह बड़ी विडंबना है कि हम मुद्दे को नहीं, बल्कि खुद को बड़ा मानते हैं। वहां हर संगठन को यह लग रहा था कि रिफॉर्म हम लाएंगे या इस्तीफा हम करवाएंगे। जब ध्यान इस पर चला जाता है कि अगुआई कौन कर रहा है, तो मुख्य मुद्दा पीछे छूट जाता है।”
चुनाव में विपक्ष की भूमिका पर वांगचुक की सलाह: ‘पहले स्थिति साफ करे’
जब वांगचुक से पूछा गया कि क्या विपक्षी दलों को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए चुनावों का बहिष्कार करना चाहिए, तो उन्होंने संतुलित रुख पेश किया:
- पहले पूरी ताकत से सुधार कराएं: वांगचुक ने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि विपक्ष चुनावों में हिस्सा ही न ले, और न ही यह कहूंगा कि वह सीधे जाकर चुनाव लड़ ले। मेरी सलाह है कि विपक्ष अभी जो कर रहा है, वही करे। वह चुनावी व्यवस्था को पारदर्शी और साफ करने में अपनी पूरी जान लगा दे। जब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट और साफ हो जाए, तभी चुनाव प्रक्रिया में शामिल हो।”
- लद्दाख की लड़ाई प्राथमिकता: उन्होंने यह भी जोड़ा कि चूंकि सीजेपी और विपक्षी दल चुनाव आयोग के मुद्दे पर पहले से काम कर रहे हैं, इसलिए उनकी व्यक्तिगत जरूरत यहां के बजाय लद्दाख के पर्यावरण, छठी अनुसूची और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई में अधिक है।
सीजेपी और विपक्ष का समानांतर दबाव
उल्लेखनीय है कि सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने मुंबई के शिवाजी पार्क से ‘जेल भरो’ और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है, जिस पर पुलिस प्रशासन और बीएमसी की भी नजर है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस और ‘INDIA’ गठबंधन ने भी 2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी मार्च और 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग के घेराव का ऐलान कर रखा है। वांगचुक के इस बयान ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि नागरिक संगठनों और विपक्षी दलों को किसी एक चेहरे के बजाय मुद्दे की गंभीरता पर एकजुट होना होगा।
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