बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग को छतरपुर जिले के चर्चित फायरिंग मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) से बड़ी कानूनी राहत मिल गई है। जिला एवं सत्र न्यायालय छतरपुर द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत अदालत ने शालिग्राम गर्ग की सशर्त जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
उच्च न्यायालय ने आरोपी शालिग्राम गर्ग को ₹50,000 के निजी मुचलके और समान राशि के स्थानीय सॉल्वेंट जमानती पेश करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश जारी किया है।
जिला अदालत ने खारिज कर दी थी जमानत याचिका इस मामले में निचली अदालत से राहत न मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा था:
- सेशन कोर्ट में अर्जी: शालिग्राम गर्ग की ओर से सबसे पहले छतरपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में विशेष न्यायाधीश निधि सक्सेना की अदालत में जमानत याचिका दाखिल की गई थी।
- 31 अगस्त को खारिज हुई थी याचिका: अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और पूर्व के आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद 31 अगस्त को विशेष अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी।
- हाईकोर्ट में बचाव पक्ष की दलील: हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि मामले की प्रारंभिक जांच आगे बढ़ चुकी है और हिरासत में रखकर पूछताछ की आगे आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने तथ्यों और परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद सशर्त जमानत मंजूर कर ली।
क्या है छतरपुर फायरिंग का पूरा मामला? यह मामला छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र का है:
- विवाद और गोलीबारी का आरोप: फरियादी मोतीलाल कुशवाहा ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में आरोप लगाया था कि पुरानी रंजिश और विवाद के चलते उन्हें गांव के चबूतरे पर बुलाया गया था। आरोप है कि वहां कहासुनी के दौरान शालिग्राम गर्ग और उनके साथियों ने उनके साथ मारपीट की और अवैध असलहे से गोली चलाई, जिससे फरियादी घायल हो गया था।
- संगीन धाराओं में FIR: राजनगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर शालिग्राम गर्ग और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा था।
जमानत की शर्तें और आगे की कानूनी प्रक्रिया हाईकोर्ट ने राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि जमानत का अर्थ मामले से बरी होना नहीं है:
- जांच और सुनवाई में सहयोग: आरोपी को ट्रायल कोर्ट की प्रत्येक पेशी पर नियमित उपस्थित रहना होगा और वह गवाहों या साक्ष्यों को किसी भी रूप से प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा।
- रिहाई की प्रक्रिया: उच्च न्यायालय का आदेश छतरपुर जेल प्रशासन और संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में प्रस्तुत किए जाने के बाद वैधानिक सत्यापन पूरा कर शालिग्राम गर्ग की जेल से रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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