विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र का दौरा कर उन आदिवासी समुदायों से मुलाकात की, जो अडानी समूह की कोयला खदान परियोजनाओं (Parsa East and Kente Basan) के कारण विस्थापित हो रहे हैं। इस दौरान राहुल गांधी ने आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के हक की लड़ाई में उन्हें अपना पूर्ण समर्थन देने का वादा किया।
यहाँ इस मुलाकात और राहुल गांधी के बयानों का मुख्य विवरण दिया गया है:
राहुल गांधी का हसदेव दौरा: मुख्य बातें
| मुख्य बिंदु | विवरण (Details) |
| स्थान | हसदेव अरण्य क्षेत्र, छत्तीसगढ़। |
| प्रमुख मुद्दा | कोयला खनन के लिए जंगलों की कटाई और आदिवासियों का विस्थापन। |
| राहुल का वादा | “सड़क से संसद तक आपकी आवाज उठाऊंगा।” |
| आरोप | सरकार आदिवासियों की जमीन छीनकर पूंजीपतियों को दे रही है। |
प्रभावित गांवों के लोगों के बीच जमीन पर बैठकर राहुल गांधी ने उनकी समस्याओं को सुना। आदिवासियों ने बताया कि कैसे पीढ़ियों पुराने जंगलों को काटा जा रहा है और उनकी संस्कृति व आजीविका पर संकट आ गया है।
राहुल गांधी के संबोधन के प्रमुख अंश:
- संसद में गूंजेगी आवाज: राहुल गांधी ने पीड़ितों को आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को लोकसभा में पूरी ताकत से उठाएंगे। उन्होंने कहा, “जब आपकी जमीन छीनी जाती है, तो केवल मिट्टी नहीं, आपका इतिहास और भविष्य भी छीना जाता है।”
- पूंजीवाद बनाम अधिकार: उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह सरकार केवल एक व्यक्ति (अडानी) के फायदे के लिए लाखों पेड़ों की बलि दे रही है। उन्होंने इसे ‘अन्याय काल’ करार दिया।
- सड़क पर संघर्ष: उन्होंने कार्यकर्ताओं और आदिवासियों से कहा कि संसद के साथ-साथ सड़क पर भी कांग्रेस पार्टी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। उन्होंने साफ किया कि बिना ग्राम सभा की अनुमति के एक इंच जमीन भी उद्योगपतियों को नहीं दी जानी चाहिए।
- हसदेव का महत्व: राहुल ने इस बात पर जोर दिया कि हसदेव अरण्य केवल आदिवासियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के पर्यावरण के लिए फेफड़ों के समान है और इसे बचाना राष्ट्रीय कर्तव्य है।
















