मप्र विधानसभा में मचने वाला है बड़ा बदलाव! अगले सत्र से हमेशा के लिए बंद हो जाएगी यह पुरानी परंपरा; 700 से सीधे 4000 पहुंचे सवाल, स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने किया चौंकाने वाला खुलासा; विधायकों के लिए शुरू हुआ खास मिशन
भोपाल, 28 अक्टूबर, 2026 (Authentic News प्रशासनिक व राजनीतिक डेस्क): मध्य प्रदेश की 16वीं विधानसभा जल्द ही एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी होने जा रही है, जो सदन की दशकों पुरानी कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदलकर रख देगा। विधानसभा का आगामी सत्र अब फाइलों, भारी-भरकम कागजों और लिखित पर्चियों के साए में नहीं, बल्कि पूरी तरह ‘पेपरलेस’ अंदाज में संचालित होगा। यानी विधायकों की मेज से कागजों का अंबार हमेशा के लिए गायब होने वाला है। इस बड़े बदलाव की जमीन तैयार करने के लिए विधानसभा में विधायकों और उनके स्टाफ का तीन दिवसीय विशेष तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसका उद्घाटन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किया।
कार्यक्रम के दौरान स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की व्यवस्थाओं को लेकर एक ऐसा चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। उन्होंने खुलासा किया कि कैसे एक नई व्यवस्था ने जनता के मुद्दों की रफ्तार को 700 से सीधे 4,000 के पार पहुंचा दिया है।
जब 700 से 4,000 पहुंच गए सवाल: तकनीक ने बदली जनता की आवाज
विधानसभा अध्यक्ष ने पुरानी और नई व्यवस्था का फर्क समझाते हुए कहा:
- कागजों का दौर बनाम डिजिटल युग: पहले जब विधायकों को अपने सवाल हाथ से लिखकर जमा करने पड़ते थे, तब विधानसभा के एक पूरे सत्र में औसतन महज 700 प्रश्न ही आ पाते थे।
- ऑनलाइन व्यवस्था का धमाका: लेकिन जैसे ही सवालों को ऑनलाइन भेजने की व्यवस्था शुरू की गई, एक ही सत्र में प्रश्नों की संख्या रिकॉर्ड 4,000 तक पहुंच गई।
- जनता की समस्याओं का त्वरित हल: तोमर ने कहा कि ये चार हजार प्रश्न केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के कोने-कोने से हर विधायक के क्षेत्र की जनता की सीधी आवाज हैं। जब इतनी बड़ी तादाद में समस्याएं सदन के जरिए सरकार के सामने आती हैं, तो व्यवस्थाएं अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनती हैं। ई-विधान लागू होने के बाद सदन की कार्यक्षमता में अभूतपूर्व इजाफा होगा।












