मप्र के शहरों में होने जा रहा है सबसे बड़ा उलटफेर! इंदौर में CM मोहन यादव ने खोला ₹2,753 करोड़ का रहस्यमयी पिटारा; बदल गए मकान बनाने और जमीन के नियम; मंच से हुए ऐसे ताबड़तोड़ ऐलान कि चौंक गया पूरा प्रदेश
इंदौर/भोपाल, 28 अक्टूबर, 2026 (Authentic News एक्सक्लूसिव): मध्य प्रदेश के महानगरों और कस्बों में रहने वाले करोड़ों लोगों की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आ गया है, जिसकी भनक कुछ घंटे पहले तक किसी को नहीं थी। बुधवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में सजे ‘मध्य प्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2026’ (Urban Growth Conclave 2.0) के मंच पर जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव माइक पर पहुंचे, तो उन्होंने एक के बाद एक ऐसे चौंकाने वाले फैसले सुनाए कि पंडाल में बैठे देश-विदेश के दिग्गज निवेशक, रियल एस्टेट कारोबारी और प्रशासनिक अफसर भी दंग रह गए।
शहरों के पुराने ढर्रे को एक झटके में बदलते हुए मुख्यमंत्री ने ₹2,753 करोड़ से अधिक के मेगा प्रोजेक्ट्स की फाइलें खोल दीं। मकान बनाने की अनुमति से लेकर गंदे पानी के उपयोग और बहुमंजिला इमारतों की ऊंचाई तक… ऐसे नियम लागू कर दिए गए हैं जो आने वाले दिनों में हर नागरिक के जीवन पर सीधा असर डालेंगे।
चुपचाप बदल गए घर बनाने के नियम: जानिए बंद लिफाफे से क्या निकला?
कॉन्क्लेव के मंच से मुख्यमंत्री ने दो ऐसी नई नीतियों के प्रारूप का अनावरण किया, जिसने रियल एस्टेट और आवास बाजार में हलचल मचा दी है:
- ‘अफोर्डेबल हाउसिंग एंड हैबिटेट पॉलिसी 2026’: अब शहर की प्राइम जमीनों पर केवल अमीरों की ऊंची सोसायटियां नहीं तनेंगी। नए नियमों के तहत बिल्डरों को किफायती और रेंटल (किराए के) आवासों के लिए कड़े प्रावधान पूरे करने होंगे। सरकारी जमीनों के ‘री-डेंसिफिकेशन’ का ऐसा खाका खींचा गया है जिससे पुराने शहरों की शक्ल रातों-रात बदल जाएगी।
- मकान की ऊंचाई और FAR के नए नियम: टियर-2 शहरों में विकास गलियारों (Development Corridors) और ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) में ऐसे गुप्त बदलाव किए गए हैं, जो अब तक केवल मुंबई या दुबई जैसे शहरों में देखे जाते थे।
गंदे पानी को लेकर सरकार का सनसनीखेज फरमान!
शहरी जल संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘ट्रीटेड वेस्टवॉटर रिसाइक्लिंग एंड रीयूज पॉलिसी 2026’ का औपचारिक ऐलान किया:
- ताजे पानी के इस्तेमाल पर पाबंदी: औद्योगिक इकाइयों, बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स और पार्कों की सिंचाई में अब पीने योग्य ताजे पानी के इस्तेमाल पर शिकंजा कसा जाएगा।
- सीवरेज पानी का अनिवार्य उपयोग: अब हर बड़े प्रोजेक्ट को सीवरेज से ट्रीट किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करना अनिवार्य कर दिया गया है। जो इस व्यवस्था को नहीं मानेगा, उसके प्रोजेक्ट्स पर ताला लटकने का खतरा पैदा हो गया है।
सिंहस्थ 2028 और ‘टेंपल बॉन्ड’ का अनोखा दांव
इस महामंथन में केवल कंक्रीट और सड़कों की बात नहीं हुई, बल्कि धार्मिक पर्यटन की आड़ में एक ऐसा वित्तीय हथियार निकाला गया जिसने अर्थशास्त्रियों के कान खड़े कर दिए हैं:
- देश में पहली बार ‘टेंपल बॉन्ड’: उज्जैन सिंहस्थ 2028 को विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी का रूप देने के लिए सरकार अब आम जनता और निवेशकों से फंड जुटाने हेतु ‘टेंपल बॉन्ड’ और ‘ग्रीन बॉन्ड’ जारी करने जा रही है।
- डिजिटल ट्विन मॉडलिंग: उज्जैन और इंदौर के पूरे महाकाल व मेट्रो कॉरिडोर को ‘डिजिटल ट्विन’ (3D वर्चुअल क्लोन) तकनीक से जोड़ा जा रहा है, जिससे भीड़ और रियल-टाइम ट्रैफिक को सैटेलाइट से नियंत्रित किया जाएगा।
₹2,753 करोड़ का अर्बन चैलेंज फंड: इन 3 शहरों की चमकेंगी किस्मतें
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत स्वीकृत ₹2,753.10 करोड़ की राशि का सबसे बड़ा हिस्सा इंदौर, उज्जैन और रीवा के कायाकल्प पर खर्च किया जा रहा है। लेटर ऑफ अवॉर्ड बांटने के साथ ही अफसरों को दो टूक चेतावनी दी गई है कि कागजी फाइलों में वक्त गंवाने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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