मध्य प्रदेश के राजनैतिक गलियारों में इस समय “दो कौड़ी का अध्यक्ष” और “भागा दूल्हा” जैसे तीखे जुमले तेजी से तैर रहे हैं। यह पूरा मामला इंदौर के चर्चित नेता अक्षय कांति बम के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जिन्होंने ऐन चुनाव के वक्त कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। लेकिन इस दलबदल के बाद भी ‘अक्षय बम’ का सियासी धमाका फीका पड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही तरफ से हो रही बयानबाजी ने यह साफ कर दिया है कि भारी-भरकम दावों के बीच अक्षय बम का खुद का राजनैतिक भविष्य इस समय पूरी तरह अधर में लटका हुआ है।
कांग्रेस का तीखा हमला– ‘दुल्हन छोड़ भागा दूल्हा’ कांग्रेस छोड़ने के बाद से ही अक्षय बम विपक्षी खेमे के निशाने पर हैं। कांग्रेस के प्रादेशिक नेताओं ने उन पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें ‘ऐसा दूल्हा बताया जो ऐन वक्त पर बारात और दुल्हन को छोड़कर भाग गया’। कांग्रेस का आरोप है कि अक्षय बम ने केवल अपने निजी और व्यावसायिक हितों को बचाने के लिए पार्टी और इंदौर की जनता के साथ विश्वासघात किया। कांग्रेस इसे लोकतंत्र की पीठ में छुरा घोंपने जैसा बता रही है और जनता के बीच जाकर इस ‘राजनैतिक धोखे’ को भुनाने की रणनीति बना रही है।
भाजपा में ‘दो कौड़ी के अध्यक्ष’ वाले बयान से बढ़ी असहजता दूसरी तरफ, भाजपा में शामिल होने के बाद भी अक्षय बम के लिए राहें आसान नहीं दिख रही हैं। हाल ही में कांग्रेस के कुछ पुराने बयानों और सोशल मीडिया वॉर में उभरे ‘दो कौड़ी का अध्यक्ष’ जैसे तीखे पलटवारों ने मामले को और गरमा दिया है। भाजपा के भीतर का एक धड़ा भी इस बात से असहज है कि बाहर से आए नेताओं को इतनी तवज्जो क्यों दी जा रही है। दलबदल के इतने दिन बीत जाने के बाद भी अक्षय बम को भाजपा संगठन में कोई बड़ी या महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिल सकी है, जिससे उनके समर्थक भी अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। राजनैतिक पंडितों की मानें तो ‘बम’ का यह दलबदल फिलहाल उनके खुद के करियर को अधर में छोड़ गया है।

















