मध्य प्रदेश की मोहन यादव कैबिनेट की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र की जांच को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अपनाए गए एक तरीके ने सरकार के भीतर ही बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जांच प्रक्रिया के तहत गांवों में ढोल पिटवाकर (मुनादी कराकर) सूचना देने और गवाह बुलाने के प्रशासनिक कदम पर बीजेपी के मंत्रियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस कार्रवाई से नाराज सरकार के छह मंत्रियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की और इसे एक महिला मंत्री की छवि को धूमिल करने की साजिश बताते हुए संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ तत्काल सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला? (The Controversy)
यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश के सतना जिले की आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट से विधायक और वर्तमान राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर है।
- कांग्रेस का आरोप: मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रतिमा बागरी और उनका परिवार मूल रूप से ‘बागड़ी राजपूत/ठाकुर’ समुदाय से आता है। आरोप के मुताबिक, उन्होंने फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा।
- हाई कोर्ट का निर्देश: इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य की उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति (High-Level Caste Scrutiny Committee) को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर समय सीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।
मुनादी (ढोल पिटवाने) पर क्यों भड़के मंत्री?
हाई कोर्ट के आदेश के बाद जब राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने जांच शुरू की, तो स्थानीय प्रशासन ने मंत्री के गृह क्षेत्र और संबंधित गांवों में ढोल बजवाकर (मुनादी कराकर) यह सार्वजनिक घोषणा करवा दी कि—यदि किसी को मंत्री की जाति को लेकर कोई आपत्ति या साक्ष्य देना है, तो वह सामने आए।
इस तरीके पर खुद मंत्री प्रतिमा बागरी ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि, “मैं जांच समिति का पूरा सहयोग कर रही हूँ और समय पर पेश भी हुई हूँ। गांवों में इस तरह ढोल पिटवाना सिर्फ मेरी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी साजिश है।”
इसी बात को लेकर कैबिनेट के अन्य छह मंत्रियों ने भी सीएम से मिलकर नाराजगी जताई कि एक मौजूदा कैबिनेट मंत्री के साथ अपराधियों जैसा प्रशासनिक रवैया अपनाकर सरकार और संगठन दोनों की छवि को ठेस पहुंचाई गई है।
मंत्री बागरी का दावा—”हमारे पास 110 साल पुराने सबूत”
इस मामले में विगत दिनों प्रतिमा बागरी स्वयं समिति के समक्ष पेश हुईं और उन्होंने अपने दादा और परदादा के समय के 110 साल पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजी रिकॉर्ड सौंपे हैं। उन्होंने मीडिया से चर्चा में दावा किया कि उनका परिवार पीढ़ियों से इसी माटी का मूल निवासी है और उनका राजपूत समुदाय से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इसे कांग्रेस की महिला विरोधी और राजनीतिक रूप से आगे बढ़ने से रोकने की कुत्सित चाल बताया है।
फिलहाल, समिति दोनों पक्षों (मंत्री बागरी और शिकायतकर्ता कांग्रेस नेता) के दस्तावेजों की स्क्रूटनी कर रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर हुई इस ‘मुनादी’ ने मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और मंत्रियों के बीच की तल्खी को सरेआम उजागर कर दिया है।












