भागीरथपुरा क्षेत्र में फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले धुएं और प्रदूषण के कारण स्थानीय निवासियों (विशेषकर बच्चों) के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया।
| निर्देश (Order) | विवरण (Details) |
| रिकॉर्ड सुरक्षा | प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम को निर्देश कि क्षेत्र से संबंधित सभी ‘टेंडर’ और ‘निरीक्षण रिकॉर्ड’ सुरक्षित रखें। |
| जांच कमेटी | कोर्ट ने एक स्वतंत्र कमेटी बनाने के संकेत दिए हैं जो प्रदूषण के स्तर की निष्पक्ष जांच करेगी। |
| जवाबदेही | प्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को अगली सुनवाई में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई। |
इंदौर का भागीरथपुरा इलाका पिछले कई महीनों से ‘गैस चैंबर’ बना हुआ है। यहाँ स्थित लघु उद्योगों और कुछ अवैध इकाइयों से निकलने वाले रसायनों और धुएं ने हज़ारों लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
मामले के गंभीर बिंदु:
- बीमार होते बच्चे: मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र के दर्जनों बच्चों को सांस की गंभीर बीमारियां और त्वचा रोग (Skin Diseases) हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय फैक्ट्रियां सीधे हवा में जहरीली गैस छोड़ती हैं।
- मिलीभगत का आरोप: याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दलील दी कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी और नगर निगम के कर्मचारी जानते हुए भी चुप्पी साधे रहे। कागजों पर ‘क्लीन चिट’ देने के लिए टेंडर और रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका जताई गई है।
- हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि “लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।” दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का आदेश इसलिए दिया गया है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की ‘रिकॉर्ड टेंपरिंग’ (सबूतों से छेड़छाड़) न हो सके।
निष्कर्ष: कोर्ट के इस आदेश ने उन अधिकारियों की नींद उड़ा दी है जिन्होंने अब तक इस मामले में लापरवाही बरती। अब नगर निगम को यह भी बताना होगा कि किस आधार पर औद्योगिक इकाइयों को रहवासी क्षेत्र के इतने करीब संचालन की अनुमति दी गई।
















