मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा और लैंगिक अपराधों की रोकथाम को लेकर पुलिस महकमे के सर्वोच्च पद से आया एक बयान इस समय चर्चा और बहस का विषय बन गया है। मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों पर अपनी राय रखते हुए कहा है कि केवल कानून, पुलिस बल या खाकी वर्दी के दम पर ऐसे अपराधों को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता।
डीजीपी ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि अनियंत्रित इंटरनेट, मोबाइल फोन पर आसानी से उपलब्ध एडल्ट व अश्लील कंटेंट (Pornography), मादक पदार्थों व शराब का अत्यधिक सेवन और पारिवारिक संस्कारों में आ रही गिरावट समाज में यौन विकृति और अपराधों को भड़काने वाले मुख्य कारक बन रहे हैं।
“अधिकांश मामलों में अपराधी परिचित या रिश्तेदार होते हैं” — DGP
डीजीपी ने आपराधिक आंकड़ों और दर्ज मुकदमों का हवाला देते हुए स्थिति की जमीनी हकीकत समझाई:
- बंद कमरों के अपराध: डीजीपी ने कहा कि सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और बाजारों में पुलिस गश्त, सीसीटीवी और पेट्रोलिंग के जरिए सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। लेकिन दुष्कर्म और छेड़छाड़ के 90 फीसदी से अधिक मामलों में आरोपी पीड़ित के रिश्तेदार, पड़ोसी, परिचित या तथाकथित दोस्त होते हैं, जो चारदीवारी के भीतर घटित होते हैं।
- पुलिस की पहुंच की सीमा: उन्होंने कहा कि कोई भी पुलिस तंत्र किसी के घर के अंदर या निजी रिश्तों की निगरानी 24 घंटे नहीं कर सकता। ऐसे में जब तक व्यक्ति की सोच और सामाजिक परिवेश नहीं बदलेगा, अपराधों पर पूर्ण विराम लगाना असंभव है।












