मध्य प्रदेश भाजपा (MP BJP) संगठन के भीतर पिछले एक साल से चल रहा सस्पेंस और अंदरूनी खींचतान आखिरकार खत्म हो गई है। लंबे इंतजार के बाद प्रदेश बीजेपी की नई और बहुप्रतीक्षित प्रदेश कार्यसमिति (State Executive Committee) की पहली औपचारिक बैठक की तारीख और स्थान दोनों तय कर लिए गए हैं। यह महत्वपूर्ण और बड़ी संगठनात्मक बैठक बुंदेलखंड के प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल ओरछा (निवाड़ी जिला) में आयोजित की जाएगी। रामराजा सरकार की नगरी ओरछा में होने वाली इस बैठक के जरिए भाजपा आगामी चुनावों और सांगठनिक फेरबदल को लेकर अपनी नई रणनीति का शंखनाद करेगी।
खींचतान के कारण एक साल तक टलती रही घोषणा
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन के स्तर पर हुए बड़े बदलावों के बाद से ही नई कार्यसमिति के गठन और उसकी बैठक को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे थे।
- नेताओं की आपसी रस्साकशी: राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस कार्यसमिति की सूची और पहली बैठक की तारीख तय होने में एक साल का लंबा वक्त इसलिए लगा क्योंकि पार्टी के भीतर गुटीय संतुलन बिठाने और दिग्गजों के समर्थकों को तवज्जो देने को लेकर पर्दे के पीछे भारी खींचतान चल रही थी।
- दिल्ली से मिली हरी झंडी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री के बीच कई दौर की बैठकों और केंद्रीय नेतृत्व (दिल्ली) के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार ओरछा के नाम पर मुहर लगी है।
क्यों चुना गया बुंदेलखंड का ओरछा?
बीजेपी द्वारा इस महा-बैठक के लिए ओरछा को चुनने के पीछे गहरी राजनैतिक और रणनीतिक वजहें मानी जा रही हैं:
- सांस्कृतिक और धार्मिक संदेश: ओरछा को ‘बुंदेलखंड की अयोध्या’ कहा जाता है। रामराजा सरकार की शरण में बैठक रखकर भाजपा अपने मूल सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को फिर से धार देगी।
- बुंदेलखंड पर विशेष फोकस: आगामी राजनैतिक समीकरणों को देखते हुए पार्टी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक अभेद्य बनाना चाहती है।
- नेताओं की जुटान: इस दो दिवसीय बैठक में प्रदेश प्रभारी, सह-प्रभारी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्रीगण, प्रदेश पदाधिकारी, सभी जिला अध्यक्ष और कार्यसमिति के सैकड़ों आमंत्रित सदस्य शामिल होंगे।
बैठक के मुख्य एजेंडे: आगामी रोडमैप होगा तैयार
ओरछा में होने वाले इस मंथन शिविर में मुख्य रूप से पार्टी के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी। बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल (Coordination), केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को बूथ स्तर तक ले जाने का रोडमैप और नए सदस्यों को दी जाने वाली जिम्मेदारियों पर गंभीर चिंतन होगा। एक साल के लंबे इंतजार के बाद हो रही इस बैठक को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है, वहीं गुटीय असंतोष को शांत करना नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती होगी।












