मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान से जुड़े मामले में विशेष एमपी-एमएलए अदालत (MP-MLA Court) से बड़ी कानूनी राहत मिल गई है। वर्ष 2024 में स्वतंत्रता दिवस से पूर्व निकाली गई तिरंगा यात्रा के दौरान वाहन पर लगे तिरंगे को लेकर दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) डी.पी. सूत्रकार की अदालत ने मामले को खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और तस्वीरें मंत्री के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई संज्ञेय अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
क्या था 11 अगस्त 2024 का तिरंगा यात्रा विवाद?
यह मामला नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा/गोटेगांव क्षेत्र में 11 अगस्त 2024 को आयोजित ‘तिरंगा यात्रा’ से जुड़ा है:
- परिवाद में लगाए गए आरोप: गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट ने अदालत में परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया था कि यात्रा के दौरान मंत्री राव उदय प्रताप सिंह एक खुली जीप में सवार थे।
- पैर छूने और बोनट पर लगाने का दावा: शिकायतकर्ता का आरोप था कि वाहन के बोनट पर राष्ट्रीय ध्वज इस प्रकार लगाया गया था कि वह कथित तौर पर मंत्री के पैरों से छू रहा था, जो कि राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) की धारा 2 का उल्लंघन है।
- ललिता कुमारी केस का हवाला: याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि स्थानीय पुलिस द्वारा प्राथमिकी (FIR) दर्ज न किए जाने के कारण उन्हें विशेष अदालत की शरण लेनी पड़ी, जहां उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) फैसले का हवाला देते हुए केस दर्ज करने की मांग की थी।
अदालत ने क्यों खारिज किया परिवाद?
विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद याचिका को आधारहीन पाते हुए खारिज किया:
- तस्वीरों में वाहन नंबर स्पष्ट नहीं: अदालत ने रेखांकित किया कि परिवादी द्वारा प्रस्तुत तस्वीरों में वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर स्पष्ट नहीं दिख रहा है।
- स्वामित्व और निर्देश का कोई प्रमाण नहीं: अदालत ने पाया कि इस बात का कोई पुख्ता प्रमाण पेश नहीं किया गया कि उक्त वाहन किसका था अथवा वाहन पर तिरंगा लगाने का निर्देश स्वयं मंत्री द्वारा दिया गया था।
- अपराध की पुष्टि नहीं: न्यायाधीश ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मंत्री की संलिप्तता या राष्ट्रीय ध्वज का जानबूझकर अनादर करने का कोई आपराधिक इरादा (Mens Rea) साबित नहीं होता है, जिसके चलते मंत्री के खिलाफ मामला चलाने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
मार्च 2026 में जारी हुआ था नोटिस
गौरतलब है कि अदालत ने इस मामले में मार्च 2026 में प्रारंभिक संज्ञान लेते हुए मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। मंत्री की ओर से पक्ष रखे जाने और अदालत द्वारा साक्ष्यों की कानूनी समीक्षा के बाद अब इस पूरे विवाद का न्यायिक पटाक्षेप हो गया है। अदालत के इस फैसले से सत्तारूढ़ दल और कैबिनेट मंत्री को कानूनी व राजनीतिक रूप से बड़ी राहत मिली है।
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