देश की आर्थिक तरक्की और सटीक नीति निर्धारण के लिए रोजगार व औद्योगिक आंकड़ों को दुरुस्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र सरकार और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के क्षेत्रीय कार्यालय ने मिलकर पीएलएफएस (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण) और आसुस (असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण) को लेकर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। इस गहन कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सांख्यिकीय अधिकारियों और फील्ड काउंटर्स को आधुनिक तकनीकों से लैस करना है ताकि राज्य में रोजगार और असंगठित व्यावसायिक उद्यमों के डेटा संकलन को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सके।
रोजगार और असंगठित क्षेत्र की जमीनी हकीकत लाएगा सामने इस विशेष कार्यशाला के समापन सत्र में वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों और सांख्यिकीविदों ने डेटा की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया। पीएलएफएस (Periodic Labour Force Survey) के माध्यम से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार और बेरोजगारी के संकेतकों (जैसे श्रम बल भागीदारी दर और श्रमिक जनसंख्या अनुपात) का त्रैमासिक व वार्षिक मूल्यांकन अधिक सटीकता से हो सकेगा। वहीं दूसरी ओर, आसुस (Annual Survey of Unincorporated Sector Enterprises) के जरिए देश और राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले असंगठित विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्रों के लाखों छोटे उद्यमों की परिचालन स्थिति का सही डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा, जिससे आर्थिक नीतियां बनाने में आसानी होगी।
डिजिटल टूल्स और टैबलेट-आधारित डेटा संग्रह पर जोर प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को इस बार मैनुअल (कागजी) प्रविष्टियों के बजाय पूरी तरह से डिजिटल और टैबलेट-आधारित कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (CAPI) तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। इससे डेटा कलेक्शन के दौरान होने वाली मानवीय गलतियों की गुंजाइश खत्म होगी और रियल-टाइम डेटा सर्वर पर अपलोड किया जा सकेगा। कार्यशाला के आयोजकों ने बताया कि इस सुदृढ़ीकरण से महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास, श्रम कल्याण योजनाओं और छोटे व्यापारियों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी के बेहतर आवंटन में मदद मिलेगी। इस प्रशिक्षण के बाद अब फील्ड सर्वेक्षक जल्द ही राज्य भर के चिन्हित क्षेत्रों में जमीनी सर्वे के लिए उतरेंगे।
















