राजधानी भोपाल के प्रमुख जलस्रोतों में शुमार केरवा जलाशय (Kerwa Dam) के कैचमेंट एरिया और 33 मीटर के नो-कंस्ट्रक्शन ग्रीन बफर जोन के सीमांकन की प्रक्रिया फुल टैंक लेवल (FTL) को लेकर उपजे विवाद के चलते अचानक रोक दी गई है। राजस्व विभाग, जल संसाधन विभाग (WRD) और नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा केरवा और कलियासोत के डूब क्षेत्र को चिह्नित करने के लिए चलाए जा रहे सर्वे में तकनीकी विसंगतियों और जमीनी माप पर आम सहमति न बनने के कारण यह गतिरोध पैदा हुआ है।
इसी बीच, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की मध्य क्षेत्रीय पीठ ने जलाशय और उससे जुड़ी वितरण लाइनों से बड़े पैमाने पर हो रहे पानी के रिसाव (Water Wastage/Leakage) पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित एजेंसियों को सभी लीकेज ठीक करने के लिए 15 दिनों का अंतिम अल्टीमेटम थमा दिया है।
FTL विवाद के कारण क्यों थमा सर्वे? जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों की पहचान के लिए जारी सर्वे में तकनीकी पेंच फंस गया है:
- जल संसाधन व राजस्व रिकॉर्ड में अंतर: जल संसाधन विभाग द्वारा रिकॉर्ड में दर्ज फुल टैंक लेवल (FTL) और राजस्व विभाग के नक्शों में दर्ज डूब क्षेत्र (Submergence Area) की सीमाओं में भारी अंतर सामने आया है।
- अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करने में अड़चन: जब तक FTL और 33 मीटर का अनिवार्य ग्रीन बफर जोन स्पष्ट रूप से डिजिटल व भौतिक पत्थरों (Pillars) से तय नहीं हो जाता, तब तक कैचमेंट में बने रिसॉर्ट्स, फार्महाउस और व्यावसायिक निर्माणों पर वैधानिक बेदखली कार्रवाई करना प्रशासन के लिए कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
- विशेषज्ञ समिति की मांग: सर्वे दल ने वास्तविक जमीनी स्तर (Ground Truth) का पुनर्मूल्यांकन करने और सिंचाई विभाग के मूल डिजाइन के आधार पर सीमांकन री-कैलिब्रेट करने के लिए काम को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया है।
NGT सख्त: ’15 दिनों के भीतर रोकी जाए पानी की बर्बादी’ पर्यावरणविदों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने जलापूर्ति तंत्र में भारी लापरवाही और पानी की बर्बादी पर कड़ी फटकार लगाई है:
- लीकेज और वाल्व मरम्मत: अधिकरण ने पाया कि स्लूस गेट्स, सप्लाई वॉल्व्स और मुख्य नहर से भारी मात्रा में शुद्ध पानी अनियंत्रित होकर बह रहा है, जबकि ग्रीष्मकाल में शहर के कई हिस्सों में जलसंकट की स्थिति पैदा होती है।
- 15 दिन की समय-सीमा: एनजीटी ने भोपाल नगर निगम (BMC) और जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर सभी मुख्य जोड़ों, वॉल्व्स और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों के लीकेज को पूरी तरह ठीक कर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करें।
- सीवरेज डिस्चार्ज पर रोक: एनजीटी ने जलाशय के डूब क्षेत्र में स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले गंदे पानी ( untreated sewage) को सीधे जलाशय में मिलने से रोकने के लिए भी समयबद्ध कार्ययोजना मांगी है।
कैचमेंट में बने अवैध फार्महाउसों पर लटकी तलवार केरवा-कलियासोत का कैचमेंट इलाका भोपाल के बाघों के प्राकृतिक मूवमेंट कॉरिडोर और समृद्ध जैव विविधता का हिस्सा है:
- जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि FTL की तकनीकी जांच पूरी होते ही कैचमेंट के 33 मीटर दायरे में आने वाले सभी पक्के निर्माणों को ध्वस्त करने का अभियान शुरू किया जाएगा।
- ग्रीन बेल्ट के नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों की बिजली-पानी की एनओसी (NOC) की भी जांच की जा रही है।
भोपाल के पर्यावरण संरक्षण, जलस्रोतों के संवर्धन, अदालती आदेशों और हर निष्पक्ष व प्रामाणिक (Authentic) रिपोर्टिंग के लिए जुड़े रहें हमारी वेबसाइट के साथ।












