मध्य प्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक राजधानी इंदौर में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (MP Transco) ने अत्याधुनिक ट्रांसमिशन तकनीक की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शहर के घने शहरी विस्तार और नई ट्रांसमिशन लाइनों के लिए जमीन (राइट ऑफ वे – ROW) की कमी को देखते हुए, एमपी ट्रांसको ने प्रमुख 132 kV ट्रांसमिशन लाइनों को हाई टेम्परेचर लो सैग (HTLS) कंडक्टरों से अपग्रेड करने का काम शुरू कर दिया है।
इस हाई-टेक अपग्रेडेशन के बाद मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर से ही बिजली वहन करने की क्षमता (Current-Carrying Capacity) लगभग तीन गुना बढ़ जाएगी, जिससे भविष्य में शहर को बिना नए टावर और नई जमीन अधिग्रहित किए निर्बाध बिजली मिल सकेगी।
इन प्रमुख ट्रांसमिशन रूट्स पर शुरू हुआ काम एमपी ट्रांसको के अनुसार, खंडवा रोड स्थित 220 kV इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन को 132 kV चंबल सबस्टेशन से जोड़ने वाली 132 kV डबल सर्किट लाइनों के दोनों सर्किटों पर री-कंडक्टरिंग का काम शुरू किया गया है। यह ट्रांसमिशन लाइन इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स और सत्य साईं सर्किट से होकर गुजरती है।
14 फीडर बे भी होंगे अपग्रेड लाइनों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सबस्टेशनों के बुनियादी ढांचे को भी नए लोड के अनुरूप तैयार किया जा रहा है:
- 5 सबस्टेशनों में काम: 132 kV चंबल सबस्टेशन, 220 kV इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन, 220 kV इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन, 132 kV इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स सबस्टेशन और 132 kV सत्य साईं सबस्टेशन पर कुल 14 फीडर बे (Feeder Bays) को अपग्रेड किया जा रहा है।
- स्विचयार्ड उपकरणों का आधुनिकीकरण: HTLS कंडक्टरों के उच्च करंट प्रवाह को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए संबंधित स्विचयार्ड और फीडर उपकरणों की रेटिंग भी बढ़ाई जा रही है।
क्या है HTLS तकनीक और इंदौर के लिए क्यों है अहम? पारंपरिक एसीएसआर (ACSR) कंडक्टरों की तुलना में HTLS कंडक्टर अधिक तापमान पर काम कर सकते हैं और अत्यधिक लोड के बावजूद इनमें सामान्य तारों की तरह अधिक झुकाव (Sag) नहीं आता।
- घने शहरी इलाकों के लिए वरदान: इंदौर जैसे महानगर में जहां रिहायशी कॉलोनियां और कमर्शियल इमारतें ट्रांसमिशन लाइनों के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं, वहां नए कॉरिडोर बनाना लगभग असंभव हो चुका था।
- मौजूदा बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग: बिना नए टावर लगाए और बिना अतिरिक्त जमीन खरीदे, मौजूदा खंभों और तारों को बदलकर ही बिजली क्षमता को तीन गुना तक बढ़ाया जा रहा है।
इस तकनीकी अपग्रेड से इंदौर के मेट्रो रेल प्रोजेक्ट, डेटा सेंटर्स, औद्योगिक क्लस्टर्स और तेजी से विकसित हो रहे रिहायशी टाउनशिप्स के लिए भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
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