पशु आहार (चारा, खली, चूरी) की आसमान छूती कीमतों और उत्पादन लागत में भारी वृद्धि के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे इंदौर जिले के दुग्ध उत्पादक किसानों ने अपने अधिकारों के लिए संगठित मोर्चा खोल दिया है। इंदौर दुग्ध संघ और निजी डेयरियों द्वारा दिए जा रहे अपर्याप्त फैट-एसएनएफ (FAT/SNF) दरों के विरोध में किसानों का ‘गांव-गांव जनसंपर्क एवं ज्ञापन अभियान’ तेजी से आगे बढ़ रहा है। सांवेर, देपालपुर, महू और कनाड़िया सहित जिले की विभिन्न दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सैकड़ों किसान इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
दूध उत्पादकों का कहना है कि वर्तमान खरीद मूल्य से पशुपालन का बुनियादी खर्च भी नहीं निकल पा रहा है, जिससे किसान कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।
पशु आहार के दाम दोगुने, दूध के भाव में नगण्य बढ़ोतरी अभियान के दौरान आयोजित चौपालों में किसानों ने आर्थिक आंकड़ों के साथ अपनी पीड़ा साझा की:
- लागत में भारी इजाफा: पिछले कुछ महीनों में बिनौला खल, चोकर, मिनरल मिक्चर और सूखे चारे की कीमतें 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। साथ ही पशु चिकित्सा और दवाइयों के खर्च में भी भारी उछाल आया है।
- फैट आधारित दरों में असमानता: किसानों का आरोप है कि इंदौर सहकारी दुग्ध संघ द्वारा वर्तमान में दिया जा रहा प्रति फैट मूल्य उत्पादन की वास्तविक लागत से काफी कम है, जबकि उपभोक्ता बाजार में पैकेटबंद दूध और घी के दाम लगातार बढ़ाए गए हैं।
- बिचौलियों और निजी संकलन केंद्रों का शोषण: ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निजी चिलिंग सेंटरों पर फैट टेस्टिंग में हेराफेरी के चलते किसानों को उनके वास्तविक दूध का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
अभियान के तहत प्रमुख मांगें गांव-गांव से पारित प्रस्तावों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों ने शासन और दुग्ध संघ प्रबंधन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- लागत आधारित न्यूनतम खरीद मूल्य (MSP की तर्ज पर): स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप दूध की उत्पादन लागत में 50 प्रतिशत जोड़कर लाभकारी मूल्य तय किया जाए।
- प्रति लीटर बोनस का प्रावधान: पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर मध्य प्रदेश शासन द्वारा भी दुग्ध उत्पादक किसानों को ₹5 प्रति लीटर का सीधा सरकारी बोनस (प्रोत्साहन राशि) प्रदान किया जाए।
- सहकारी समितियों में आधुनिक फैट-मापन प्रणाली: सभी प्राथमिक ग्रामीण दुग्ध संकलन केंद्रों पर पारदर्शी डिजिटल मिल्क एनालाइजर और ऑटोमेटेड टेस्टिंग उपकरण अनिवार्य किए जाएं।
- पशु आहार पर अनुदान: दुग्ध संघ द्वारा उच्च गुणवत्ता वाला संतुलित पशु आहार किसानों को रियायती और नो-प्रॉफिट दरों पर नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को सौंपे जा रहे ज्ञापन अभियान के तहत किसान प्रतिनिधिमंडल प्रत्येक ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर पर तहसीलदार, जनपद सीईओ और स्थानीय विधायकों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप रहे हैं।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के भीतर दुग्ध संघ और शासन स्तर पर खरीद दरों की समीक्षा कर लाभकारी मूल्य घोषित नहीं किए गए, तो इंदौर शहर में दूध की आपूर्ति रोककर ‘दूध हड़ताल’ और चक्काजाम जैसा उग्र कदम उठाया जाएगा।
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