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    संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते राहुल गांधी और दूसरी तरफ मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सख्त लहजे में जवाब देते महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कोलाज तस्वीर।

    महाराष्ट्र TET पेपर लीक पर देशव्यापी उबाल; राहुल गांधी ने दागे तीखे सवाल, सीएम देवेंद्र फडणवीस का पलटवार—”भ्रष्टाचारियों को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे”

    इंदौर के रीगल चौराहे पर हजारों साइकिल सवार युवाओं और छात्रों के हुजूम के बीच साइकिल चलाते हुए हुंकार भरते मप्र कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी।

    इंदौर से भोपाल तक कांग्रेस का ‘युवा स्वाभिमान साइक्लोथॉन’; जीतू पटवारी बोले—”मोदी सरकार ने युवाओं के सपनों पर ताले लगाए, हम उन्हें तोड़ने निकले हैं”

    एक तरफ हाथ में भगवा ध्वज थामे संघ स्वयंसेवक और दूसरी तरफ हाथ जोड़े खड़े पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रतीकात्मक कोलाज तस्वीर।

    दिग्विजय सिंह की ‘धर्म रक्षा यात्रा’ में शामिल होने के लिए संघ के स्वयंसेवक ने रखी अनोखी शर्त; लिखा पत्र—”भगवा ध्वज त्यागकर आने को तैयार, बस एक निवेदन स्वीकार लें”

    CJP संस्थापक अभिजीत दिप्के का विवादास्पद बयान जंतर मंतर प्रदर्शन के दौरान

    दलित विरोधी बयान से भड़के लोग: CJP संस्थापक को विरोध का सामना

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संपत्ति का ब्योरा या महज खानापूर्ति? 810 में से 470 IAS-IPS और IFS अफसरों ने दी अधूरी जानकारी, केंद्र ने दी कड़ी चेतावनी

Authentic News by Authentic News
March 18, 2026
in National, News
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Official document of Immovable Property Return (IPR) with a stamp of 'Incomplete' and a silhouette of a high-ranking bureaucrat.

image source:google.com

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अखिल भारतीय सेवा (IAS, IPS, IFS) के अधिकारियों द्वारा अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने में बरती जा रही ढिलाई एक गंभीर प्रशासनिक मुद्दा है। 31 जनवरी 2026 की समय सीमा समाप्त होने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वे सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।

नई दिल्ली: सरकारी तंत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी अखिल भारतीय सेवा (All India Services) अधिकारियों को हर साल अपनी अचल संपत्ति का रिटर्न (Immovable Property Return – IPR) दाखिल करना अनिवार्य है। लेकिन साल 2026 की ताजा रिपोर्ट चौंकाने वाली है। आंकड़ों के अनुसार, कुल 810 अधिकारियों की समीक्षा में से 470 अधिकारियों ने अपनी संपत्ति की जानकारी या तो अधूरी छोड़ी है या उसे अस्पष्ट रखा है।

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July 15, 2026
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July 15, 2026

नियमों की अनदेखी और ‘Nil’ का खेल कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के नियमों के मुताबिक, अधिकारियों को 31 जनवरी तक पिछले वर्ष का ब्योरा देना होता है। रिपोर्ट में सामने आया है कि कई अधिकारियों ने अपनी करोड़ों की संपत्ति के कॉलम में ‘No Change’ या ‘Same as last year’ लिखकर खानापूर्ति की है। वहीं, एक बड़ी संख्या उन अधिकारियों की भी है जिन्होंने खुद को ‘भूमिहीन’ या ‘शून्य संपत्ति’ वाला बताया है, जो जांच के घेरे में है।

केंद्र सरकार का सख्त रुख: रुक सकता है प्रमोशन इस लापरवाही पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार:

  • जिन अधिकारियों ने समय पर या सही ब्योरा नहीं दिया है, उन्हें अगले स्तर के पे-मैट्रिक्स (Promotion) के लिए अयोग्य माना जाएगा।
  • ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग के लिए जरूरी विजिलेंस क्लीयरेंस (Vigilance Clearance) नहीं दिया जाएगा।
  • नियम 16(2) के तहत दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

डिजिटल निगरानी और SPARROW पोर्टल अब सरकार ने ‘स्पैरो’ (SPARROW) पोर्टल के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऑटोमेटेड कर दिया है। 31 जनवरी के बाद यह पोर्टल खुद-ब-खुद बंद हो जाता है, जिससे बैक-डेट में एंट्री करना नामुमकिन है। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में अधिकारियों का डिफॉल्टर लिस्ट में होना प्रशासनिक सुचिता पर सवालिया निशान लगाता है।

विशेषज्ञों की राय: वरिष्ठ विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अधूरी जानकारी देने पर सख्त दंड का प्रावधान जमीन पर लागू नहीं होगा, तब तक यह प्रक्रिया केवल एक वार्षिक औपचारिकता बनी रहेगी। भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए संपत्तियों का सार्वजनिक सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए।

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