देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और अनूठा प्रयोग शुरू किया है। इंदौर नगर निगम (IMC) द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों और जोनल कार्यालयों में संचालित ‘रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल’ (RRR) केंद्रों पर अब नागरिकों को अनुपयोगी वस्तुएं जमा करने पर बदले में जीवित पौधे (Saplings) उपहार स्वरूप दिए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत यदि नागरिक अपने घरों से निकलने वाली पुरानी किताबें, रद्दी कॉपियां और सूखा प्लास्टिक कचरा RRR केंद्र पर जमा करते हैं, तो उन्हें नगर निगम की नर्सरी से तैयार किए गए फलदार, फूलदार और औषधीय पौधे मुफ्त बांटे जा रहे हैं।
स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार सिरमौर रहे शहर को अब ‘हरित इंदौर’ (Green Indore) बनाने के संकल्प के साथ यह योजना तेजी से जनआंदोलन का रूप ले रही है।
‘कचरा दो, हरियाली लो’ मॉडल: कैसे काम कर रही है व्यवस्था? नगर निगम के उद्यान एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग के संयुक्त प्रयास से शुरू हुई इस व्यवस्था को सरल और जनसुलभ बनाया गया है:
- किताबों और कॉपियों का पुनः उपयोग: घरों में पड़ी पुरानी पाठ्यपुस्तकों, संदर्भ पुस्तकों और कॉपियों को एकत्र कर जरूरतमंद व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी छात्रों और झुग्गी बस्तियों में संचालित ‘किताब बैंक’ (Book Banks) तक पहुंचाया जा रहा है।
- प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक रीसाइकलिंग: नागरिकों से मिलने वाले सिंगल-यूज प्लास्टिक, खाली बोतलों और प्लास्टिक के बर्तनों को सीधे रीसाइकलिंग प्लांट्स में प्रोसेस कर पेवर ब्लॉक, बेंच और अन्य उपयोगी सामग्री बनाने के काम में लिया जा रहा है।
- पौधों का वितरण: न्यूनतम निर्धारित मात्रा में किताबें या प्लास्टिक कचरा लाने वाले प्रत्येक नागरिक को तुलसी, गिलोय, नीम, मनी प्लांट, एरिका पाम और विभिन्न सजावटी व छायादार पौधे सौंपे जा रहे हैं।
शहर के 85 वार्डों में सक्रिय हैं RRR केंद्र इंदौर नगर निगम ने सभी 19 जोनों के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों और कचरा संग्रहण केंद्रों पर RRR सेंटर्स को सुदृढ़ किया है:
- वार्ड स्तर पर पहुंच: आम लोग आसानी से अपने नजदीकी केंद्र पर सुबह और शाम के समय अनुपयोगी सामग्री जमा करा सकते हैं।
- महिलाओं और बच्चों में उत्साह: स्कूलों और सोसायटियों में जागरूकता अभियान चलाए जाने के बाद बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और गृहणियां अपनी पुरानी स्टेशनरी और घर का प्लास्टिक लेकर केंद्रों पर पहुंच रहे हैं।
- डिजिटल रिकॉर्ड व कूपन: केंद्रों पर सामग्री जमा करने वालों का डेटा दर्ज कर उन्हें डिजिटल सराहना प्रमाण-पत्र और विशेष ग्रीन कूपन भी जारी किए जा रहे हैं।
‘सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरण दोनों को संबल’ — निगमायुक्त निगम अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का दोहरा फायदा शहर को मिल रहा है। एक तरफ लैंडफिल साइट (ट्रेंचिंग ग्राउंड) पर जाने वाले सूखे कचरे के वजन में उल्लेखनीय कमी आ रही है, वहीं दूसरी तरफ शहरवासियों के घरों की बालकनियों और आंगनों में हरियाली का दायरा बढ़ रहा है।
अधिकारियों ने इंदौर की जनता से अपील की है कि वे सूखे प्लास्टिक को इधर-उधर या कचरा वाहनों में फेंकने के बजाय RRR केंद्र पर लाकर दें, जिससे शहर न केवल स्वच्छता में शीर्ष पर बना रहे बल्कि ‘नेट जीरो’ और हरियाली के मामले में भी पूरे देश के लिए अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करे।
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