संगठन में आंतरिक विवाद और दो फाड़ होने के बाद अब दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच अपनी-अपनी पहचान और आधिकारिक चुनाव चिन्ह हासिल करने की होड़ तेज हो गई है। आगामी चुनावों और संगठनात्मक गतिविधियों के मद्देनजर दोनों पक्षों ने अपने पसंदीदा प्रतीकों की प्राथमिकता सूची संबंधित प्राधिकारी/निर्वाचन निकाय को सौंप दी है। जहां एक तरफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ (Football Player) और ‘क्रिकेट बैट’ (Bat) जैसे खेल प्रतीकों को अपनी पहली प्राथमिकता बनाया है, वहीं दूसरी तरफ रीतब्रत बनर्जी गुट ने बौद्धिक और सामाजिक संदेश देने वाले ‘लिफाफा’ (Envelope), ‘मशाल’ (Torch) और ‘ब्लैकबोर्ड’ (Blackboard) के विकल्पों का प्रस्ताव भेजा है।
दोनों पक्षों द्वारा अलग-अलग और विशिष्ट प्रतीकों के चयन के बाद अब निगाहें नियामक निकाय के अंतिम आवंटन आदेश पर टिक गई हैं।
ममता बनर्जी गुट की पसंद: खेल, ऊर्जा और जनसंपर्क के प्रतीक ममता बनर्जी गुट की ओर से दाखिल किए गए आवेदन में युवाओं और खेल भावना को आकर्षित करने वाले चिन्हों को प्राथमिकता दी गई है:
- ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ बना पहली पसंद: पश्चिम बंगाल और स्थानीय जनमानस में फुटबॉल के गहरे जुड़ाव को देखते हुए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ को सर्वोच्च वरीयता में रखा गया है। इसके जरिए जनआंदोलन और ऊर्जावान नेतृत्व का संदेश देने की रणनीति मानी जा रही है।
- विकल्प के रूप में ‘बैट’: दूसरे मजबूत विकल्प के तौर पर ‘क्रिकेट बैट’ का प्रस्ताव दिया गया है, जो आम जनमानस में बेहद लोकप्रिय और आसानी से पहचाना जाने वाला प्रतीक है।
रीतब्रत गुट की रणनीति: संदेश, संघर्ष और शिक्षा से जुड़े विकल्प दूसरी ओर, रीतब्रत गुट ने अपने कैडर और वैचारिक पृष्ठभूमि को साधते हुए प्रतीकों की तीन सूचियां प्रस्तुत की हैं:
- लिफाफा (Envelope): गोपनीयता, संवाद और कार्यकर्ताओं तक संदेश पहुंचाने के प्रतीक के रूप में लिफाफे को मुख्य सूची में शामिल किया गया है।
- मशाल (Torch): संघर्ष, सामाजिक क्रांति और अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का परिचायक ‘मशाल’ हमेशा से जन-आंदोलनों और ट्रेड यूनियनों का प्रभावशाली प्रतीक रहा है।
- ब्लैकबोर्ड (Blackboard): शिक्षा, बौद्धिक संवाद और व्यवस्था सुधार के संदेश के साथ ‘ब्लैकबोर्ड’ का विकल्प तीसरे नंबर पर रखा गया है।
प्राधिकारी के पाले में गेंद; जल्द हो सकता है अंतिम फैसला दोनों गुटों के दावों और प्रस्तावित प्रतीकों की सूची प्राप्त होने के बाद संबंधित प्रशासनिक व निर्वाचन प्राधिकारी ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है:
- नियमों और उपलब्धता का परीक्षण: फ्री सिंबल लिस्ट (मुक्त प्रतीकों की सूची) के अनुसार यह देखा जा रहा है कि इनमें से कौन से प्रतीक किसी अन्य पंजीकृत संगठन या दल के पास आरक्षित तो नहीं हैं।
- अंतिम अधिसूचना: यदि दोनों पक्षों के प्राथमिक चिन्हों में कोई टकराव नहीं होता है, तो नियमानुसार तय वरीयता के आधार पर दोनों गुटों को अलग-अलग चिन्ह आवंटित कर अंतिम अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
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