कहते हैं कि किसी भी रिश्ते की नींव ‘विश्वास’ पर टिकी होती है, लेकिन जब इसी नींव में ‘शक’ का ज़हर घुल जाता है, तो परिणाम अक्सर विनाशकारी होते हैं। एक हालिया और रूह कंपा देने वाली वारदात में, एक व्यक्ति ने अपने ही पार्टनर पर बेवफाई का शक होने के चलते उसे तेजधार हथियार से मौत के घाट उतार दिया। इस सिरफिरे कदम ने न केवल एक निर्दोष की जान ली, बल्कि पीछे छूट गए बच्चों और परिवार को कभी न भरने वाले जख्म दे दिए।
जानकारी के अनुसार, आरोपी और पीड़ित के बीच पिछले कुछ समय से अनबन चल रही थी। आरोपी अक्सर पार्टनर के चरित्र पर संदेह करता था, जिसे लेकर घर में रोज़ाना विवाद होता था। घटना वाले दिन यह विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी ने आपा खो दिया और घर में रखे तेजधार हथियार से हमला कर दिया। चीख-पुकार सुनकर जब तक पड़ोसी मदद के लिए पहुँचते, तब तक मासूम बच्चों के सामने ही उनका हंसता-खेलता परिवार बिखर चुका था।
पुलिस ने मौके पर पहुँचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि वह अंधे शक की गिरफ्त में था।
“यह केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का वह चरम रूप है जहाँ संवाद की जगह हिंसा ले लेती है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य और इम्पल्स कंट्रोल की कमी एक बड़ा कारण होती है।
- सोशल मीडिया और डिजिटल निगरानी के चलते भी कपल्स के बीच शक की भावना तेज़ी से बढ़ रही है।
- समय रहते काउंसलिंग न मिलना भी विवाद को खूनी अंजाम तक पहुँचा देता है।
इस घटना ने समाज को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ अपनों पर विश्वास करना मुश्किल होता जा रहा है? पुलिस अब मामले की तहकीकात कर रही है और सख्त से सख्त सजा दिलाने की बात कह रही है। लेकिन सवाल वही बना हुआ है—उस उजड़े हुए परिवार और उन मासूम बच्चों का क्या, जिनका भविष्य उनके अपने ही पिता/पार्टनर के एक गलत फैसले ने अंधकार में धकेल दिया।

















