राजधानी भोपाल के प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 62वीं पुण्यतिथि पर एक विशेष श्रद्धांजलि सभा और बौद्धिक विमर्श का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रख्यात पत्रकार राजेश बादल ने नेहरूवियन दर्शन और आधुनिक भारत के निर्माण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। इस दौरान दिग्विजय सिंह ने वर्तमान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, तो वहीं राजेश बादल ने पाकिस्तान के निर्माता मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर एक बड़ा ऐतिहासिक दावा किया।
असहमतियों पर जुल्म हो रहे, शासन व्यवस्था अंग्रेजों जैसी: दिग्विजय सिंह श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पंडित नेहरू को एक ‘युगांतकारी नेता’ और आधुनिक भारत का शिल्पकार बताया। उन्होंने कहा कि नेहरू एक समावेशी, धर्मनिरपेक्ष और विज्ञान-सम्मत राष्ट्र का निर्माण करना चाहते थे। वर्तमान परिदृश्य पर चिंता जताते हुए सिंह ने कहा, “आज देश में अंधविश्वासों को स्थापित करने की चेष्टाएं चल रही हैं। आम नागरिक परेशान है और आज की शासन व्यवस्था अंग्रेजों की तरह त्रासदायी हो गई है, जहां असहमतियों पर जुल्म ढाए जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता चाहे बहुसंख्यक की हो या अल्पसंख्यक की, देश के लिए हमेशा खतरनाक होती है।
जिन्ना भारत आकर नेहरू से माफी मांगना चाहते थे: राजेश बादल कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और राज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यपालक निदेशक राजेश बादल ने अपनी निर्देशित डॉक्यूमेंट्री “युग पुरुष नेहरू” का प्रदर्शन किया। उन्होंने एक ऐतिहासिक संदर्भ साझा करते हुए बताया कि विभाजन के बाद जब जिन्ना का भ्रम टूटा, तो उन्होंने मृत्यु से पूर्व ‘फ्रंटियर पोस्ट’ अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वे भारत आकर नेहरू से माफी मांगना चाहते हैं। जिन्ना अपनी वसीयत के अनुसार मुंबई (बंबई) में ही दफन होना चाहते थे। इसी वजह से बाद में पाकिस्तान की सरकारों ने उन्हें ‘कायदे आजम’ की जगह ‘काफिरे आजम’ कहना शुरू कर दिया था।
मात्र 197 करोड़ का था देश का पहला बजट: भूपेंद्र गुप्ता कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने बताया कि नेहरू को जब देश मिला तब भयंकर गरीबी थी। देश की पहली सरकार का बजट मात्र 197 करोड़ रुपये था, जबकि आज एक छोटी नगरपालिका का बजट भी इससे ज्यादा है। उन्होंने याद दिलाया कि जब अमेरिका ने स्टील प्लांट बनाने से मना किया, तो नेहरू ने रूस की मदद से देश को स्टील निर्यातक बनाया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, सुधीर सक्सेना सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे और अंत में मौन श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

















